नारंगी सी एक शाम,
और उसी रंग में घुली नदी।
नदी के शांत किनारे पर,
वो छोटा सा इक लड़का,
और उसके हाथ में,
नारंगी फूलों से भरी इक डलिया,
गेंदे के फूल और वही पुरानी महक।
वही पुराना किस्सा,
उसका हक और उसका हिस्सा,
हाथों में उसके किताब नहीं है,
गेंदे के फूल उसको रास नहीं हैं।