इक छोटी सी लड़की है,
दो चार शब्द हैं,
अनगिनत भावनाएँ हैं,
असीम प्रेम है।
फिर भी वो लड़की है,
लड़का नहीं।
यही सोच है,
इतना ही विचार है।
कैसा संसार है?
बिल्कुल बेज़ार है।
इंसानियत तार तार है
सब कुछ व्यापार है
हममें तुममें क्या कुछ शेष है?
अंतर्मन में यह द्वंद्व बार बार है।