हर तरफ़ धुआँ है
हर तरफ़ कुहासा है
जो दाँतों और दलदलों का दलाल है
वही देशभक्त है

अंधकार में सुरक्षित होने का नाम है—
तटस्थता।
यहाँ कायरता के चेहरे पर
सबसे ज़्यादा रक्त है।
जिसके पास थाली है
हर भूखा आदमी
उसके लिए, सबसे भद्दी
गाली है

हर तरफ़ कुआँ है
हर तरफ़ खाई है
यहाँ, सिर्फ़, वह आदमी, देश के क़रीब है
जो या तो मूर्ख है
या फिर ग़रीब है!

धूमिल की कविता 'रोटी और संसद'

Book by Dhoomil:

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सुदामा पाण्डेय 'धूमिल'
सुदामा पाण्डेय धूमिल हिंदी की समकालीन कविता के दौर के मील के पत्थर सरीखे कवियों में एक है। उनकी कविताओं में आजादी के सपनों के मोहभंग की पीड़ा और आक्रोश की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है। व्यवस्था जिसने जनता को छला है, उसको आइना दिखाना मानों धूमिल की कविताओं का परम लक्ष्य है।

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