Tag: Dhoomil

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सच्ची बात

बाड़ियाँ फटे हुए बाँसों पर फहरा रही हैं और इतिहास के पन्नों पर धर्म के लिए मरे हुए लोगों के नाम बात सिर्फ़ इतनी है स्नानाघाट पर जाता...
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शान्ति-पाठ

अख़बारों की सुर्ख़ियाँ मिटाकर दुनिया के नक़्शे पर अन्धकार की एक नयी रेखा खींच रहा हूँ, मैं अपने भविष्य के पठार पर आत्महीनता का दलदल उलीच रहा हूँ। मेरा...
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पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
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हर तरफ़ धुआँ है

हर तरफ़ धुआँ है हर तरफ़ कुहासा है जो दाँतों और दलदलों का दलाल है वही देशभक्त हैअंधकार में सुरक्षित होने का नाम है— तटस्थता। यहाँ कायरता के चेहरे पर सबसे ज़्यादा रक्त है। जिसके...
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बीस साल बाद

बीस साल बाद मेरे चेहरे में वे आँखें लौट आयी हैं जिनसे मैंने पहली बार जंगल देखा है: हरे रंग का एक ठोस सैलाब जिसमें सभी पेड़...
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कविता के भ्रम में

क्या तुम कविता की तरफ़ जा रहे हो? नहीं, मैं दीवार की तरफ़ जा रहा हूँ।फिर तुमने अपने घुटने और अपनी हथेलियाँ यहाँ क्यों छोड़ दी हैं? क्या...
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वसन्त

इधर मैं कई दिनों से प्रतीक्षा कर रहा हूँ : कुर्सी में टिमटिमाते हुए आदमी की आँखों में ऊब है और पड़ोसी के लिए लम्बी यातना के बाद किसी तीखे शब्द...

उस औरत की बग़ल में लेटकर

'Us Aurat Ki Bagal Mein Letkar', a poem by Dhoomilमैंने पहली बार महसूस किया है कि नंगापन अन्धा होने के ख़िलाफ़ एक सख़्त कार्यवाही हैउस औरत की बग़ल...
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जनतन्त्र के सूर्योदय में

रक्तपात— कहीं नहीं होगा सिर्फ़, एक पत्ती टूटेगी! एक कन्धा झुक जाएगा! फड़कती भुजाओं और सिसकती हुई आँखों को एक साथ लाल फीतों में लपेटकर वे रख देंगे काले दराज़ों के...

कुछ सूचनाएँ

'Kuchh Soochnaaein', a poem by Sudama Pandey Dhoomilसबसे अधिक हत्याएँ समन्वयवादियों ने कीं। दार्शनिकों ने सबसे अधिक ज़ेवर खरीदा। भीड़ ने कल बहुत पीटा उस आदमी को जिस का मुख ईसा...
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सार्वजनिक ज़िन्दगी

मैं होटल के तौलिये की तरह सार्वजनिक हो गया हूँ क्या ख़ूब, खाओ और पोंछो, ज़रा सोचो, यह भी क्या ज़िन्दगी है जो हमेशा दूसरों के जूठ से गीली रहती...

रोटी और संसद

एक आदमी रोटी बेलता है एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है वह सिर्फ़ रोटी से खेलता...

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अनुवाद: पंखुरी सिन्हा औंधा पड़ा सपना प्यार दरअसल फाँसी का पुराना तख़्ता है, जहाँ हम सोते हैं! और जहाँ से हमारी नींद, देखना चाह रही होती है चिड़ियों की ओर!मत...
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डेज़ी रॉकवेल के इंटरव्यू के अंश

लेखक ने अपनी बात कहने के लिए अपनी भाषा रची है, इसलिए इसका अनुवाद करने के लिए आपको भी अपनी भाषा गढ़नी होगी। —डेज़ी...
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पुस्तक अंश: प्रेमचंद : कलम का सिपाही

भारत के महान साहित्यकार, हिन्दी लेखक और उर्दू उपन्यासकार प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। प्रेमचंद ने अपने जीवन काल में कई रचनाएँ...
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प्रिया सारुकाय छाबड़िया एक पुरस्कृत कवयित्री, लेखिका और अनुवादक हैं। इनके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें नवीनतम 'सिंग ऑफ़ लाइफ़ रिवीज़निंग...
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