कवि के पास होती है,
आधी कविता,
आधा व्यक्तित्व,
कि आधे व्यक्तित्व को पालती है कविता,
कि आधी कविता को पालता है व्यक्तित्व,
और ये तब तक चलता है
जब तक कविता को अपना सब कुछ देकर
मौन हो जाता है व्यक्तित्व
और बोल पड़ती है कविता…

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