आपदा प्रबन्धन

कहीं किसी कोने में
जीवन यात्रा के भी
हो एक आपातकालीन खिड़की

आपदाओं के शिकार
कुछ टूटे/हारे रिश्ते
पहुँच नहीं पाते
अपने अन्तिम पड़ाव तक।

आवेदन

नहीं था कोई कॉलम
किसी भी आवेदन-पत्र में
जहाँ लिखी जा सकती थी

पृथ्वी
स्थायी पते की जगह

और आवेदक की जगह
मनुष्य

पूर्वाग्रह

जितनी सहजता
और निजता से
एक निरीह पक्षी जा बैठता है
एक अपरिचित पशु की पीठ पर
ओ मनुष्य,
क्या तुम दे सकते हो उसे
उतनी सहजता
उतनी निजता
परिचय के पूर्व
प्रेम से पूर्व
पूर्व किसी भी पूर्वाग्रह के?

अदरक

पहली झलक में
आप इन्हें देख सकते हैं
चिमनियों से निकले
मटमैले धुएँ की तरह

मगर इन्हें दिखाया जा रहा है
फ़ैक्ट्रियों से बहाए गए
रासायनिक कचरे की तरह

असुविधा यह है कि
इनका मैलापन और दुर्गन्ध
बाधा हैं लगातार देखने में

आप महसूस करते हैं इन्हें
अपने ‘महान राष्ट्र’ के
फेफड़ों में भरे टार की तरह
मगर इनमें भरी झुँझलाहट
आप नहीं देख पा रहे

सभ्यता की परत से नीचे पसरते
ये भारत के लोग
आपको देखना चाहिए इन्हें
अदरक की तरह
जिसे काटकर/कुचलकर
मात्र आँकड़े छुपाए/बदले जा रहे हैं लगातार
मगर कड़वाहट शेष है जड़ों में
शिराओं के अन्तिम सिरे तक।

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परमानन्द रमन
जन्मतिथि : 20/12/1983 जन्म-स्थान : जमशेदपुर(तात्कालीन बिहार, वर्तमान झारखण्ड) ग्राम: करहसी, जिला- रोहतास (बिहार) आरंभिक शिक्षा बारहवीं तक जमशेदपुर में ही, तत्पश्चात कला शिक्षा में स्नातक के लिये इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के मूर्तिकला विभाग में दाखिला। स्नातकोत्तर की शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के मूर्तिकला विभाग से। यूजीसी नेट(NET) एवं बीएचयू क्रेट(CRET) पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण। साल 2011 से केन्द्रीय विद्यालय संगठन में कला शिक्षक के पद पर कार्यरत वर्तमान में केन्द्रीय विद्यालय ए.एस.सी बैंगलुरू में कार्यरत। बचपन से ही साहित्य एवं कला में रूची, स्कूल एवं विश्वविद्यालय स्तर पर कविता लेखन एवं वाद-विवाद में पुरस्कार। कविताएं हिन्दी समाचार पत्र एवं संभावना(बीएचयू, हिन्दी विभाग, कला संकाय से प्रकाशित) स्त्रीकाल, लिटरेचर प्वाइंट, काव्यसागर, सौतुक, दैनिक भास्कर(पटना सिटी), अमर ऊजाला पत्रिका,लल्लन टाँप, अहा! जिंदगी, मधुरिमा (साप्ताहिक) एवं प्रभात खबर होली विशेषांक में प्रकाशित। ईमेल : [email protected]