ऊँचाइयाँ

गुरुत्वाकर्षण
पदार्थो के
गिरने का
अद्वितीय नियम है।
हर चीज़ फिर
गिरती है,
मज़दूर की तरह,
नीचे की तरफ़।
पटरियों पर
चौड़े हाईवे पर
नदियों के भीतर
गटर के अन्दर
कारख़ानों में
खदानों में
पाखानों में,
पर उसके लिए
एक पूर्वशर्त है
‘ऊँचाइयाँ’
इमारतों की
पुलों की
टावरों की
उम्मीदों की
योजनाओं की
देश के
स्वाभिमान की,
और
एक आधुनिक
इंसान की।

विज्ञान की भावना

भावना
धार्मिक ही क्यों?
विज्ञान आधारित
भी तो होती है।
जो जुड़ी है,
प्रमाण से
चिन्तन से
सत्य से
तर्क से
प्रश्न से
आलोचना से
वास्तविकता से।
स्वयं के,
दृश्य से
श्रव्य से
स्पर्श से
स्वाद से
गन्ध तक।
और इसकी क़द्र
न होना ही है
इस सदी की
सबसे बड़ी क्रूरता।

भूख

भूख
करोड़ों पेटों का
भीषण आक्रोश है,
यह किसी
दान का नहीं
हक़ का विषय है!

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