Tag: A poem on Women Empowerment

Woman, Window, Bus, Train

मैं मार दी जाऊँगी

मेरी आग बरसाती आँखें कसती भिंचभिंचाती मुठ्ठियाँ कँपकँपाते-फरफराते होंठ थरथराता-क्रोधित शरीर जवाब दे बैठता है, जब खण्डहरों में चीख़ते हैं मासूम आहत परिन्दे सियासियों, सत्ताधारियों की इमारतों में क़ैद बिलखती-तड़पती हैं भुखमरी, बेचारगी, लाचारी...
Girl Power, Girl, No

सुनो लड़की

सुनो लड़की! शक्लें छिपाए और आँखें गड़ाए हुए गिद्ध जैसे निशाना साधे बैठे हैं कई लोग यहाँ। तुम छुपना मत आँखें नीची मत करना, दुपट्टा कहीं खिसका तो नहीं, इसकी भी परवाह...
Archana Verma

आदत

'Aadat', a poem by Archana Verma मरदों ने घर को लौटने का पर्याय बना लिया और लौटने को मर जाने का घर को फिर उन्होंने देखा ही नहीं लौटकर...
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