Tag: Ashish Bihani

Ashish Bihani - Andhkaar Ke Dhaage

सुरसा के मुख से: स्क्रीन

समक्ष खड़े शख्स के शब्दों से भागते हुए उसके चेहरे के उतारों और चढ़ावों पर निगाह सरकाते हुए तुम धीरे-धीरे नीचे आते हो और अन्यमनस्कता को बड़े...
Ashish Bihani - Andhkaar Ke Dhaage

सुरसा के मुख से: भाईसाब

भाईसाब तुम तुर्रमखां नहीं कोई तुम्हारे जैसे तराशे नक्श फैक्ट्री में बनकर आते हैं मेरी दुकान पर लाइन से खड़े होकर मुंहबोली रक़म देकर फ्रूट खरीदते...
Ashish Bihani - Andhkaar Ke Dhaage

सुरसा के मुख से: खड़ताल

सुबह-सुबह वो नहलाये ताज़ातरीन बाल फैलाए खड़ताल बजाती हुई निकलती है गाँव की पहली आँख खुलने से भी पहले पतली कच्ची कीचड़ लदी गलियों के उबकाहट भरे जंजाल...
Ashish Bihani - Andhkaar Ke Dhaage

सुरसा के मुख से: दबोच

एक पथरीले चेहरे वाली आग चबाती है किसी झोंपड़ी को कर्णभेदी शोर के साथ हवाओं को छाती पीटकर ललकारते हुए कोई बाघ गर्दन दबाता है अपने शिकार...
Ashish Bihani - Andhkaar Ke Dhaage

सुरसा के मुख से: बोर

'Sursa Ke Mukh se: Bor', a poem by Ashish Bihaniआँखों में रोष भरे वो कोशिश करता है एक चुटकुला सुनाने की और सभा की चुप्पी उसे नागवार...

STAY CONNECTED

42,081FansLike
20,941FollowersFollow
29,122FollowersFollow
1,870SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Shivangi

डिस्फ़ोरिया

हम पृथ्वी की शुरुआत से स्त्री हैं सरकारें बदलती रहीं तख़्त पलटते रहे हम स्त्री रहे विचारक आए विचारक गए हम स्त्री रहे सैंकड़ों सावन आए अपने साथ हर दूषित चीज़ बहा...
Aankhein - Sara Shagufta

पहला हर्फ़

पाकिस्तानी शायरा सारा शगुफ़्ता की नज़्मों का पहला संग्रह 'आँखें' उनकी मृत्यु के बाद सन् 1985 में प्रकाशित हुआ था। हाल ही में इसी...
Magnus Grehn

स्वीडिश कवि मैगनस ग्रेन की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा आंधी के बाद सेंट फ़ेगंस जाने की राह में एम 4 पर हमारी गाड़ी दौड़ गई वेल्स के बीचों-बीच सेंट फ़ेगंस की ओर आंधी के बाद...
Naomi Shihab Nye

नेओमी शिहैब नाय की कविता ‘प्रसिद्ध’

नेओमी शिहैब नाय (Naomi Shihab Nye) का जन्म सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था। उनके पिता एक फ़िलिस्तीनी शरणार्थी थे और उनकी माँ जर्मन...
Shehar Se Dus Kilometer - Nilesh Raghuwanshi

किताब अंश: ‘शहर से दस किलोमीटर’ – नीलेश रघुवंशी

'शहर से दस किलोमीटर' ही वह दुनिया बसती है जो शहरों की न कल्पना का हिस्सा है, न सपनों का। वह अपने दुखों, अपने...
Shri Vilas Singh

श्रीविलास सिंह की कविताएँ

सड़कें कहीं नहीं जातीं सड़कें कहीं नहीं जातीं वे बस करती हैं दूरियों के बीच सेतु का काम, दो बिंदुओं को जोड़तीं रेखाओं की तरह, फिर भी वे पहुँचा देती...
Ret Samadhi - Geetanjali Shree

गीतांजलि श्री – ‘रेत समाधि’

गीतांजलि श्री का उपन्यास 'रेत समाधि' हाल ही में इस साल के लिए दिए जाने वाले बुकर प्राइज़ के लिए चयनित अन्तिम छः किताबों...
Tom Phillips

टॉम फ़िलिप्स की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा युद्ध के बाद ज़िन्दगी कुछ चीज़ें कभी नहीं बदलतीं बग़ीचे की झाड़ियाँ हिलाती हैं अपनी दाढ़ियाँ बहस करते दार्शनिकों की तरह जबकि पैशन फ़्रूट की नारंगी मुठ्ठियाँ जा...
Javed Alam Khan

जावेद आलम ख़ान की कविताएँ

तुम देखना चांद तुम देखना चांद एक दिन कविताओं से उठा ज्वार अपने साथ बहा ले जाएगा दुनिया का तमाम बारूद सड़कों पर क़दमताल करते बच्चे हथियारों को दफ़न...
Shyam Bihari Shyamal - Sangita Paul - Kantha

श्यामबिहारी श्यामल जी के साथ संगीता पॉल की बातचीत

जयशंकर प्रसाद के जीवन पर केंद्रित उपन्यास 'कंथा' का साहित्यिक-जगत में व्यापक स्वागत हुआ है। लेखक श्यामबिहारी श्यामल से उपन्यास की रचना-प्रकिया, प्रसाद जी...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)