Tag: Balbir Singh Rang

Balbir Singh Rang

ओ समय के देवता, इतना बता दो

ओ समय के देवता! इतना बता दो— यह तुम्हारा व्यंग्य कितने दिन चलेगा?जब किया, जैसा किया, परिणाम पाया हो गए बदनाम ऐसा नाम पाया, मुस्कुराहट के नगर...
Balbir Singh Rang

मिलना तो मन का होता है

मिलना तो मन का होता है, तन की क्या दरकार बटोही।जो मिलकर भी मिल न सके हों सोचो तो उनकी मजबूरी, धन्यवाद उसको जिसने की और अधिक...
Balbir Singh Rang

अभी निकटता बहुत दूर है

'Abhi Nikatata Bahut Door Hai', Hindi Kavita by Balbir Singh Rangअभी निकटता बहुत दूर है, अभी सफलता बहुत दूर है, निर्ममता से नहीं, मुझे तो ममता...
Balbir Singh Rang

पीछे जा रहा हूँ मैं

जो गए आगे उन्हीं से प्रेरणा लेकर जो रहे पीछे उन्हें नव चेतना देकर रंग ऐसा हूँ सभी पर छा रहा हूँ मैं कौन कहता है कि पीछे जा...
Balbir Singh Rang

आइए मरुभूमि में उद्यान की चर्चा करें

आइए मरुभूमि में उद्यान की चर्चा करें, ध्वंस के सन्दर्भ में निर्माण की चर्चा करें।निर्झरों, नदियों, तड़ागों की प्रगति को साधुवाद, सिंधु में उठते हुए तूफ़ान...

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नेओमी शिहैब नाय (Naomi Shihab Nye) का जन्म सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था। उनके पिता एक फ़िलिस्तीनी शरणार्थी थे और उनकी माँ जर्मन...
Shehar Se Dus Kilometer - Nilesh Raghuwanshi

किताब अंश: ‘शहर से दस किलोमीटर’ – नीलेश रघुवंशी

'शहर से दस किलोमीटर' ही वह दुनिया बसती है जो शहरों की न कल्पना का हिस्सा है, न सपनों का। वह अपने दुखों, अपने...
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सड़कें कहीं नहीं जातीं सड़कें कहीं नहीं जातीं वे बस करती हैं दूरियों के बीच सेतु का काम, दो बिंदुओं को जोड़तीं रेखाओं की तरह, फिर भी वे पहुँचा देती...
Ret Samadhi - Geetanjali Shree

गीतांजलि श्री – ‘रेत समाधि’

गीतांजलि श्री का उपन्यास 'रेत समाधि' हाल ही में इस साल के लिए दिए जाने वाले बुकर प्राइज़ के लिए चयनित अन्तिम छः किताबों...
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तुम देखना चांद तुम देखना चांद एक दिन कविताओं से उठा ज्वार अपने साथ बहा ले जाएगा दुनिया का तमाम बारूद सड़कों पर क़दमताल करते बच्चे हथियारों को दफ़न...
Shyam Bihari Shyamal - Sangita Paul - Kantha

श्यामबिहारी श्यामल जी के साथ संगीता पॉल की बातचीत

जयशंकर प्रसाद के जीवन पर केंद्रित उपन्यास 'कंथा' का साहित्यिक-जगत में व्यापक स्वागत हुआ है। लेखक श्यामबिहारी श्यामल से उपन्यास की रचना-प्रकिया, प्रसाद जी...
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किताब अंश: शाहीन बाग़ – लोकतंत्र की नई करवट

भाषा सिंह की किताब 'शाहीन बाग़ : लोकतंत्र की नई करवट' उस अनूठे आन्दोलन का दस्तावेज़ है जो राजधानी दिल्ली के गुमनाम-से इलाक़े से...
Woman with dupatta

सहेजने की आनुवांशिकता में

कहीं न पहुँचने की निरर्थकता में हम हमेशा स्वयं को चलते हुए पाते हैं जानते हुए कि चलना एक भ्रम है और कहीं न पहुँचना यथार्थदिशाओं के...
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