Tag: Bhagwat Rawat

Bhagwat Rawat

मनुष्य

दिखते रहने के लिए मनुष्य हम काटते रहते हैं अपने नाख़ून छँटवाकर बनाते-सँवारते रहते हैं बाल दाढ़ी रोज़ न सही तो एक दिन छोड़कर बनाते ही रहते हैंजो...
Bhagwat Rawat

इतनी बड़ी मृत्यु

आजकल हर कोई, कहीं न कहीं जाने लगा है हर एक को पकड़ना है चुपके-से कोई ट्रेन किसी को न हो कानों-कान ख़बर इस तरह पहुँचना है...
Bhagwat Rawat

आग पेटी

फिर से खाया धोखा इस बार रत्ती भर नहीं आयी समझदारी ले आया बड़े उत्साह से सीली हुई बुझे रोगन वाली दियासलाई घर में समझकर सचमुच की आग पेटी बिल्कुल...
Bhagwat Rawat

करुणा

सूरज के ताप में कहीं कोई कमी नहीं न चन्द्रमा की ठण्डक में लेकिन हवा और पानी में ज़रूर कुछ ऐसा हुआ है कि दुनिया में करुणा की कमी...
Bhagwat Rawat

चिड़ियों को पता नहीं

चिड़ियों को पता नहीं कि वे कितनी तेज़ी से प्रवेश कर रही हैं कविताओं में।इन अपने दिनों में खासकर उन्हें चहचहाना था उड़ानें भरनी थीं और घंटों गरदन में...
Bhagwat Rawat

हमने चलती चक्की देखी

हमने चलती चक्की देखी हमने सब कुछ पिसते देखा हमने चूल्हे बुझते देखे हमने सब कुछ जलते देखाहमने देखी पीर पराई हमने देखी फटी बिवाई हमने सब कुछ रखा...
Bhagwat Rawat

वे इसी पृथ्वी पर हैं

इस पृथ्वी पर कहीं न कहीं कुछ न कुछ लोग हैं ज़रूर जो इस पृथ्वी को अपनी पीठ पर कच्छपों की तरह धारण किए हुए हैं बचाए...

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