Tag: Communalism

Dwarka Bharti

द्वारका भारती की कविताएँ

द्वारका भारती पंजाबी भाषा के सुपरिचित कवि, लेखक व उपन्यासकार हैं और पिछले कई सालों से पंजाबी दलित साहित्य आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे...
Yashasvi Pathak

यशस्वी पाठक की कविताएँ

कविताएँ: यशस्वी पाठक एक कवि और लेखकों की शामें दोस्तों के साथ या सड़कों पर गश्त लगाते गुज़रती हैं जहाँ गर्भ धारण करते हैं उनके मस्तिष्क जिससे जन्म...
Alok Dhanwa

सफ़ेद रात

पुराने शहर की इस छत पर पूरे चाँद की रात याद आ रही है वर्षों पहले की जंगल की एक रातजब चाँद के नीचे जंगल पुकार रहे थे...
premchand

साम्प्रदायिकता और संस्कृति

प्रेमचंद का लेख 'साम्प्रदायिकता और संस्कृति' | 'Sampradayikta Aur Sanskriti', an article by Premchand साम्प्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है। उसे अपने असली...
Prabhat

प्रभात की कविताएँ

क़स्बे का कवि वह कोई अधिकारी नहीं है कि लोग जी सर, हाँ सर कहते हुए काँपें उसके सामने नेता नहीं है कि इंसानों का समूह पालतू कुत्तों के...
God, India, Worship, Faith, Prayer, Temple, Hindu

सबसे उर्वर ज़मीन

"पाषाण तराशे गए, सुंदर और सुंदर। भगवान कहा गया उन्हें......भेद तब खुल गया जब मूरत के सामने मनुष्यता का सबसे जघन्य और बर्बर दृश्य भी भगवान के चेहरे पर शिकन न ला सका।"

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Lee Min Yung

कविता सरहदों के पार, हक़ीक़त के बीच दरार और कुछ बेतरतीब विचार

वरिष्ठ ताइवानी कवि एवं आलोचक ली मिन-युंग की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का संकलन 'हक़ीक़त के बीच दरार' जुलाई में पाठकों तक पहुँचा। साहित्यिक...
Thaharti Sanson Ke Sirhane Se - Ananya Mukherjee

दुःख, दर्द और उम्मीद का मौसम (अनन्य मुखर्जी की कैंसर डायरी)

'ठहरती साँसों के सिरहाने से' अनन्या मुखर्जी की डायरी है जो उन्होंने 18 नवम्बर, 2018 को स्तन कैंसर से लड़ाई हार जाने से पहले...
Kantha - Shyam Bihari Shyamal

कंथा : जयशंकर प्रसाद के जीवन और युग पर केन्द्रित उपन्यास

मूर्धन्य साहित्यकार जयशंकर प्रसाद का साहित्य सर्वसुलभ है लेकिन उनके 'तुमुल कोलाहल' भरे जीवन की कहानी से दुनिया अब तक प्रायः अपरिचित रही है।...
Hungry, Poor

अहमद नियाज़ रज़्ज़ाक़ी की नज़्में

अब अब कहाँ है ज़बान की क़ीमत हर नज़र पुर-फ़रेब लगती है हर ज़ेहन शातिराना चाल चले धड़कनें झूठ बोलने पे तुलीं हाथ उठते हैं बेगुनाहों पर पाँव अब रौंदते...
Man lying on footpath, Homeless

तीन चित्र : स्वप्न, इनकार और फ़ुटपाथ पर लेटी दुनिया

1 हम मृत्यु-शैय्या पर लेटे-लेटे स्वप्न में ख़ुद को दौड़ता हुआ देख रहे हैंऔर हमें लगता है हम जी रहे हैं हम अपनी लकड़ियों में आग के...
Fair, Horse Ride, Toy

मेला

1 हर बार उस बड़ी चरखी पर जाता हूँ जो पेट में छुपी हुई मुस्कान चेहरे तक लाती है कई लोग साल-भर में इतना नहीं हँसते जितना खिलखिला लेते हैं...
Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
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