Tag: Freedom of Speech
आज़ाद कवि
अपराधी-सा
जब उन्हें पकड़ा गया
वो हमेशा की तरह अपने कामों में व्यस्त थे,
लहूलुहान जंगल और नदी के ज़ख़्मों पर मलहम लगा
फूलों को सुरक्षित करने के...
एक दरख़्वास्त
ज़िन्दगी के जितने दरवाज़े हैं, मुझ पे बंद हैं
देखना— हद्द-ए-नज़र से आगे बढ़कर देखना भी जुर्म है
सोचना— अपने अक़ीदों और यक़ीनों से निकलकर सोचना...
हत्या के रहस्य
उन्होंने पकड़ के रखा हुआ है
हमारी गर्दनों को
अपने हाथों से, रक्त से
सने हुए हैं उनके हाथ
हमारे हाथ
उनके मुताबिक़ काम करते हैं
हमारी आँख
उनके इशारे पर...
डरो
कहो तो डरो कि हाय यह क्यों कह दिया
न कहो तो डरो कि पूछेंगे चुप क्यों हो
सुनो तो डरो कि अपना कान क्यों दिया
न...



