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शुरू के आदमी
"मैंने अपने पिछले खत में लिखा था कि आदमी और जानवर में सिर्फ अक्ल का फर्क है। अक्ल ने आदमी को उन बड़े-बड़े जानवरों से ज्यादा चालाक और मजबूत बना दिया जो मामूली तौर पर उसे नष्ट कर डालते।"
आदमी कब पैदा हुआ
"तुमको यह भी मालूम होगा कि ऊँचे दरजे के जानवरों को अपने बच्चों से थोड़ा-बहुत प्रेम होता है। आदमी सबसे ऊँचे दरजे का जानवर है, इसलिए माँ और बाप अपने बच्चों को बहुत प्यार करते और उनकी हिफाजत करते हैं।"
जानवर कब पैदा हुए
"वे अपने को उसी तरह का बना लेते हैं जैसे उनके आसपास की चीजें हों। उनका रंग इसलिए बदल जाता है कि वे अपने को दुश्मनों से बचा सकें, क्योंकि अगर उनका रंग आस-पास की चीजों से मिल जाए तो वे आसानी से दिखाई न देंगे। सर्द मुल्कों में उनकी खाल पर बाल निकल आते हैं जिससे वे गर्म रह सकें। इसीलिए चीते का रंग पीला और धारीदार होता है, उस धूप की तरह, जो दरख्तों से हो कर जंगल में आती है। वह घने जंगल में मुश्किल से दिखाई देता है।"
जानदार चीजें कैसे पैदा हुईं
"तुम पूछोगी कि जमीन पर जानदार चीजों का आना कब शुरू हुआ और पहले कौन-कौन सी चीजें आईं। यह बड़े मजे का सवाल है, पर इसका जवाब देना आसान नहीं है। पहले यह देखो कि जान है क्या चीज। शायद तुम कहोगी कि आदमी और जानवर जानदार हैं। लेकिन दरख्तों और झाड़ियों, फूलों और तरकारियों को क्या कहोगी? यह मानना पड़ेगा कि वे सब भी जानदार हैं। वे पैदा होते हैं, पानी पीते हैं, हवा में साँस लेते हैं और मर जाते हैं। दरख्त और जानवर में खास फर्क यह है कि जानवर चलता-फिरता है, और दरख्त हिल नहीं सकते।"
जमीन कैसे बनी
अनुवाद: प्रेमचंद
तुम जानती हो कि जमीन सूरज के चारों तरफ घूमती है और चाँद जमीन के चारों तरफ घूमता है। शायद तुम्हें यह भी...
शुरू का इतिहास कैसे लिखा गया
संसार को जानना और उसके रहस्यों को खंगालना एक बालक मन के लिए वह खेल है जो वास्तव में उनकी समझ को विकसित करने का एक माध्यम भी बनता है। इसी माध्यम के महत्त्व को पहचानते हुए जवाहरलाल नेहरू ने अपनी बेटी को कुछ पत्र लिखे जिनमें उन्होंने संसार के प्राचीनतम रूप और उस रूप में मानवों के दखल के बारे में बातें की हैं! ये पत्र बच्चों से एक बुनियादी स्तर पर जाकर बातें करते हैं, जिसे हमारी शिक्षा प्रणाली कहीं भूल चुकी है.. पढ़िए और अपने आसपास के बच्चों को पढ़ाइये!
संसार पुस्तक है
एक बच्चे का इस संसार से परिचय कैसे कराना चाहिए, इसे लेकर माता-पिता में शायद हमेशा एक संशय रहता है.. अपने तरीकों को लेकर हम निश्चित नहीं हो पाते. लेकिन जवाहरलाल नेहरू का इंदिरा के नाम यह पत्र एक रास्ता ज़रूर दिखाता है, जिसका अनुसरण माता-पिता और अध्यापक दोनों कर सकते हैं..


