Tag: Meenakshi Misra

Girl, Woman

पीड़ा, नायिका

पीड़ा ढल चुका है दिन ढल गया पुष्पों का यौवन... अछोर आकाश में अब चाँद ढल रहा धीरे-धीरे डूब रहे हैं नक्षत्र देखो! रात ढल गई आधी-आधी... आयु ढल गई ढल गए वे दिन सहर्ष जिए थे जो...
Fish Eyes, Boy, Girl, Abstract

भाषा बनाम कवि

कितनी अशक्त है वह भाषा जो नहीं कर पाती पक्षियों के कलरव का अनुवाद जिसके व्याकरण में सज़ायाफ़्ता हैं मछलियाँ मेहराबों पर तैर नहीं सकतीं जिसके सीमान्त में रहते...
Stone Faced Woman

भय

बेरौनक़ रहता है अब वो चेहरा अक्सर ईश्वर की अक़ीदत में हो जाते थे सुर्ख़ जिसके गाल कभी एक अजीब भय में तब्दील होने लगती हैं उसकी...
Woman holding leaf

मीनाक्षी मिश्र की कविताएँ

अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुए अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुए मैंने जाना जब कोई धुन पहुँचती है गंतव्य तक सही-सलामत तब पैर थिरकने से पहले थिरकती है आत्मा जीवन...

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RECENT POSTS

Ashok Vajpeyi

वही तो नहीं रहने देगा

कविता संग्रह 'कहीं नहीं वहीं' से  प्रेम वही तो नहीं रहने देगा उसके शरीर की लय को, उसके लावण्य की आभा को उसके नेत्रों के क्षितिज ताकते एकान्त...
Devesh Path Sariya

स्त्री से बात

स्त्री से बात करने के लिए निश्चित तौर पर तुम में सलीक़ा होना चाहिए फिर सीखो उसे सुनते जाना उसकी चुप्पी के आयाम तक सीखो ख़ुद भी बातें बनाना कभी चुप हो...
Sahir Ludhianvi

इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए

इंसाफ़ का तराज़ू जो हाथ में उठाए जुर्मों को ठीक तोले ऐसा न हो कि कल का इतिहासकार बोले मुजरिम से भी ज़ियादा मुंसिफ़ ने ज़ुल्म ढाया कीं पेश...
Agyeya

क्योंकि मैं

क्योंकि मैं यह नहीं कह सकता कि मुझे उस आदमी से कुछ नहीं है जिसकी आँखों के आगे उसकी लम्बी भूख से बढ़ी हुई तिल्ली एक गहरी मटमैली पीली...
Parveen Shakir

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की

कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की उसने ख़ुशबू की तरह मेरी पज़ीराई की कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उसने बात तो सच है मगर...
Woman Abstract

अपर्याप्त

क्रोध का हलाहल इतना व्याप्त था कि उसका सम्पूर्ण अस्तित्व हो गया था विषमय मेरे पास थी सिर्फ़ एक बूँद मिठास चाहा था उसे सागर में घोलना उसे मीठा करना पर...
Orhan Veli Kanik

ओरहान वेली की दो कविताएँ

कविताएँ: ओरहान वेली अनुवाद: देवेश पथ सारिया मेरी पूर्व पत्नी हर रात तुम मेरे सपनों में आती हो हर रात मैं तुम्हें साटन की सफ़ेद चादर पर देखता...
Manav Kaul - Antima

मानव कौल – ‘अंतिमा’

मानव कौल के उपन्यास 'अंतिमा' से उद्धरण | Quotes from 'Antima' by Manav Kaul चयन व प्रस्तुति: पुनीत कुसुम   "बहुत वक़्त तक मैं मेरे भीतर की...
Alok Kumar Mishra

‘क’ से ‘कमल’, ‘क’ से ‘कश्मीर’

'क' से 'कमल' वाले इस देश में 'क' से 'कश्मीर' भी हो सकता है पर उसके लिए आँखों को थोड़ा सजल करना होगा हृदय में उतरना होगा दिमाग़ की परतों...
Kaun Hain Bharat Mata - Purushottam Agrawal

किताब अंश: ‘कौन हैं भारत माता?’ – पुरुषोत्तम अग्रवाल

राष्ट्र और राष्ट्रवाद को लेकर देश में लगातार चल रही बहसों के बीच राजकमल प्रकाशन ने 'कौन हैं भारत माता' पुस्तक प्रकाशित की है।...
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