Tag: Ramnika Gupta

Ramnika Gupta

गधे का सर

हाथों का हाथी हूँ पाँव का घोड़ा सर पर धर दिया है तुमने घोड़े जैसा सब्र के गधे का सर कोल्हू के बैल की तरह आँखों पर बाँध दिया तुमने चमड़े...
Ramnika Gupta

तुम साथ देते तो

तुम साथ देते तो मैं— सात समुन्द्रों को पीने की ललक अगस्त्य मुनी से छीन लाती, ब्रह्माण्ड में धरती-सी घूम-घूम अपने अक्ष पर तुम्हारे गिर्द घूमने का दम भरती, शनि और मंगल के...
Ramnika Gupta

वरमाला रौंद दूँगी

एक बड़ी बारादरी में सिंहासनों पर सजे तुम बैठे हो— कई चेहरों में वरमाला के इंतज़ार में बारादरी के हर द्वार पर तुमने बोर्ड लगा रखे हैं 'बिना इजाज़त महिलाओं को बाहर जाना मना...
Girl, Woman, Smiling, Window

मैं आज़ाद हुई हूँ

खिड़कियाँ खोल दो शीशे के रंग भी मिटा दो परदे हटा दो हवा आने दो धूप भर जाने दो दरवाज़ा खुल जाने दोमैं आज़ाद हुई हूँसूरज आ गया है मेरे कमरे में अन्धेरा...
Ramnika Gupta

उसे रोने की मनाही

अभिजन जमात में कवि चितेरे शिल्पी कलाकार-साहित्यकार सब ने औरत को ख़ूब निखारा संजोया-सँवाराउसकी ग़ुलामी को कहा मर्यादा हत्या को क़ुर्बानी मौत को मुक्ति जल जाने को सती सौन्दर्य को 'माया' ठगनी ख़ुद्दारी को कुल्टा नटनी कुटनी और...

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अनुवाद: पंखुरी सिन्हा औंधा पड़ा सपना प्यार दरअसल फाँसी का पुराना तख़्ता है, जहाँ हम सोते हैं! और जहाँ से हमारी नींद, देखना चाह रही होती है चिड़ियों की ओर!मत...
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डेज़ी रॉकवेल के इंटरव्यू के अंश

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आधे-अधूरे: एक सम्पूर्ण नाटक समीक्षा: अनूप कुमार मोहन राकेश (1925-1972) ने तीन नाटकों की रचना की है— 'आषाढ़ का एक दिन' (1958), 'लहरों के राजहंस' (1963)...
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लम्बी कविता: डरावना स्वप्न (एक)हर रात वही डरावना सपना लगभग तीन से चार बजे के बीच आता है और रोम-रोम कँपा जाता है बहुत घबराहट के साथ पसीने-पसीने हुआ-सा...
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