Tag: Satire

Mask, Satire, Vyangya, Clown

व्यंग्य की कुछ परिभाषाएँ (भारतीय व विश्व चिंतकों द्वारा)

"व्यंग्य जीवन से साक्षात्कार करता है। विसंगति, मिथ्याचारों और पाखण्डों का पर्दाफाश करता है... अच्छा व्यंग्य सहानुभूति का सबसे उत्कृष्ट रूप होता है।" -...
Khwaja Hasan Nizami

लाख नाऊ नहीं, करोड़ नाऊ

"लखनऊ की निस्बत सुना है, पहले वहाँ नाई आबाद थे और उनकी एक लाख की बस्ती थी, लाख नाई से लाख नाऊ हुआ और लाख नाऊ से लखनऊ बन गया।"
bhartendu harishchandra

चूरन का लटका

"चूरन खाएँ एडिटर जात, जिनके पेट पचै नहीं बात। चूरन साहेब लोग जो खाता, सारा हिंद हजम कर जाता। चूरन पुलिसवाले खाते, सब कानून हजम कर जाते।" भारतेंदु हरिश्चंद्र का रचनाकाल 1857 की क्रांति के बाद का रहा, जब अंग्रेज़ी शासन के खिलाफ कुछ भी कहना लोगों को महंगा पड़ जाता था.. ऐसे में भारतेंदु ने फिर भी हास्य व्यंग्य का सहारा लेकर अंग्रेज़ी शासन की खूब आलोचना की.. यह आलोचना ही आगे चलकर राष्ट्रीय चेतना के लेखन का आधार बनी.. पढ़िए यह कविता भारतेंदु के नाटक 'अंधेर नगरी चौपट राजा' से!
Talib Khundmiri

खटमलों की फ़रियाद

एक दिन एक जोंक से कुछ खटमलों ने ये कहा दीजिए ख़ाला हमें भी कोई ऐसा मशवरा अब बजाए खून कोई और ही शै पी सकें आदमी...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)