Tag: Urdu Nazm

Tanveer Anjum

जब सोच रही थी मैं एक नज़्म

जब सोच रही थी मैं एक नज़्म वो निकल गई बराबर से नाराज़गी से मुझे देखतीतवज्जोह नहीं दे सकी मैं उनकी दानिश-मंदाना बातों परपढ़ा तारीख़ गुज़रने के...
Azra Abbas

दो ज़िंदगियाँ

हम दो ज़िंदगियां जी रहे हैं एक वो जो तुम देख रहे हो हमें अच्छे कपड़े पहन कर घूमते हुए हंसते मुस्कुराते हुए एक वो, जो हम सह...
Majaz Lakhnavi

बोल! अरी ओ धरती बोल!

बोल! अरी ओ धरती बोल! राज सिंहासन डाँवाडोल! बादल बिजली रैन अँधयारी दुख की मारी प्रजा सारी बूढ़े बच्चे सब दुखिया हैं दुखिया नर हैं दुखिया नारी बस्ती बस्ती लूट...
Gouri Chugh

सिंड्रेला

सुनो लड़की! इस बार कोयले की राख को पेशानी पर रगड़ लेना हालात की सौतेली बहनों से समझौता तुम कर लेना नहीं आएगी परी कोई तुम्हारा मुस्तक़बिल...
Fahmida Riaz

मेघदूत

सनसनाहटों के साथ गड़गड़ाहटो के साथ आ गया पवन रथ पे बैठ कर मेरा मेघ देवता दोश पर हवाओं के बाल उड़ाता हुआ उसका जामुनी बदन आसमाँ पे छा गया दूर तक गरज...
Light, Night, Street

रतजगों का ज़वाल

'रतजगों का ज़वाल' - शहरयारवो अँधेरी रात की चाप थी जो गुज़र गई कभी खिड़कियों पे न झुक सकी किसी रास्ते में न रुक सकीउसे जाने किस...
Gulnaz Kausar

ये वो धरती नहीं है

नहीं ये वो धरती नहीं है नहीं ये वो धरती नहीं है जहाँ मेरा बचपन मेरा तितलीयों, फूलों, रंगों से लबरेज़ बचपन किसी शाहज़ादी की रंगीं कहानी...
Kishwar Naheed

क़ैद में रक़्स

सब के लिए ना-पसंदीदा उड़ती मक्खी कितनी आज़ादी से मेरे मुँह और मेरे हाथों पर बैठती है और इस रोज़-मर्रा से आज़ाद है जिस में मैं...
Zehra Nigah

एक पुरानी कहानी

किसी शहर में इक कफ़न चोर आया जो रातों को क़ब्रों में सूराख़ करके तन ए कुश्तगां से कफ़न खींच लेता आख़िर ए कार पकड़ा गया और उसको...
Yudhishthira - Ambar Bahraichi

युधिष्ठिर

अभी चीड़ के जंगलों से गुज़रना बहुत जाँ-फ़ज़ा है कई मील के बाद बर्फ़ीले तूदों का सहरा मिलेगा जहाँ सर्द पुरवाइयों के थपेड़े थिरकते मिलेंगे उमूदी ढलानों...
Shamim Karhani

खण्डहर

इसी उदास खण्डहर के उदास टीले पर जहाँ पड़े हैं नुकीले से सुरमई कंकर जहाँ की ख़ाक पे शबनम के हार बिखरे हैं शफ़क़ की नर्म किरन...
Girl, Dupatta, Sun

रस की अनोखी लहरें

"मैं ये चाहती हूँ कि दुनिया की आँखें मुझे देखती जाएँ यूँ देखती जाएँ जैसे कोई पेड़ की नर्म टहनी को देखे लचकती हुई नर्म टहनी को देखे.."

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चेन च्येन वू की कविताएँ

ताइवान के नांताऊ शहर में सन् 1927 में जन्मे कवि चेन च्येन वू मंदारिन, जापानी और कोरियाई भाषाओं में पारंगत कवि हैं। अपने कई...
Ekaterina Grigorova

बुल्गारियाई कवयित्री एकैटरीना ग्रिगरोवा की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा सामान्यता मुझे बाल्टिक समुद्र का भूरा पानी याद है! 16 डिग्री तापमान की अनंत ऊर्जा का भीतरी अनुशासन!बदसूरत-सी एक चीख़ निकालती है पेट्रा और उड़ जाता है आकाश में बत्तखों...
Naomi Shihab Nye

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विनीता अग्रवाल बहुचर्चित कवियित्री और सम्पादक हैं। उसावा लिटरेरी रिव्यू के सम्पादक मण्डल की सदस्य विनीता अग्रवाल के चार काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके...
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विस्मृति से पहले मेरी हथेली को कैनवास समझ जब बनाती हो तुम उस पर चिड़िया मुझे लगता है तुमने ख़ुद को उकेरा है अपने अनभ्यस्त हाथों से।चारदीवारी और एक...
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लेखक ने अपनी बात कहने के लिए अपनी भाषा रची है, इसलिए इसका अनुवाद करने के लिए आपको भी अपनी भाषा गढ़नी होगी। —डेज़ी...
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