अनुपमा मिश्रा

अनुपमा मिश्रा
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Raghuvir Sahay

प्रेम नयी मनःस्थिति

दुःखी-दुःखी हम दोनों आओ बैठें अलग-अलग देखें, आँखों में नहीं हाथ में हाथ न लें हम लिए हाथ में हाथ न बैठे रह जाएँ बहुत दिनों बाद आज इतवार मिला...
Shrikant Verma

हस्तक्षेप

कोई छींकता तक नहीं इस डर से कि मगध की शांति भंग न हो जाए, मगध को बनाए रखना है तो मगध में शांति रहनी ही चाहिए मगध है, तो शांति...
nirmal gupt

साइकिल पर टँगी ढोलक

अलसभोर जा रहा साइकिल पर बांधे सलीक़े से मढ़ी, हरी पीली ढोलकें, इसकी थाप पर सदियाँ गाती आयीं अपने समय के मंगलगान जटिल समय में सवाल यह, कौन...
Sadness, Melancholy

आषाढ़ की भरी दोपहरी में लिखी एक उदास कविता

दर्द याद रहता है ख़ुशी गुम हो जाती है दंश विस्मृत नहीं होता स्पर्श में से बचा रह जाता है उतना हिस्सा जो रह जाता है उँगलियों पर चिपककर। भूख...
Rag Ranjan

मैं जहाँ कहीं से लौटा

मैंने कभी फूल नहीं तोड़े, जब भी उन्हें छुआ अपनी उंगलियों के पोरों पर एक सतर्क कृतज्ञता महसूस की मैंने किताबों में निशानदेही नहीं की कभी नहीं मोड़ा कोई...
Pankaj Singh

भविष्यफल

कोई एक अक्षर बताओ कोई रंग कोई दिशा किसी एक फूल का नाम लो कोई एक धुन याद करो कोई चिड़िया कोई माह—जैसे वैशाख खाने की किसी प्रिय चीज़ का नाम...
Mahavir Prasad Dwivedi

मेरी आँखों का दौलतपुर

बीता हुआ और बीत रहा हर एक क्षण स्मृति बनता चला जाता है। कुछ स्मृतियाँ सिर्फ़ स्मृतियाँ न रहकर अंतस पटल पर शिलालेख-सी अमिट...
Gaurav Bharti

कविताएँ : जुलाई 2020

माँ ने नहीं देखा है शहर गुज़रता है मोहल्ले से जब कभी कोई फेरीवाला हाँक लगाती है उसे मेरी माँ माँ ख़रीदती है रंग-बिरंगे फूलों की छपाई वाली चादर और...
Ullas Pandey

उल्लास पाण्डेय की कविताएँ

1 इस नीरवता में जैसे खींची गई लकीर के दोनों ओर मैं खड़ा हूँ एक खाई की तरह, मेरे बीचों बीच कोई फ़्रंटियर है जिससे मैं अछूता हूँ जैसे अब तक...
Srilal Shukla

अंगद का पाँव

वैसे तो मुझे स्टेशन जाकर लोगों को विदा देने का चलन नापसंद है, पर इस बार मुझे स्टेशन जाना पड़ा और मित्रों को विदा...
Couple holding moon

संतुलन, संगीत

संतुलन 1 आश्चर्य है, हँसने के लिए कारण खोजता व्यक्ति रो देता है अकारण! किसी को प्रेम करना उसकी दुःख-निधि पर अपना अधिकार जमाना है, किसी से प्रेम पाना उसके सुखों...
Woman Face Painting

अनूदित पीड़ाएँ

आसमान साफ़ होकर भी धुंधलाया था। पीड़ा के खंडित अवशेष पाषाण नहीं होते हमेशा। अनूदित पीड़ाएँ लहलहाते खेतों में बंजर अवशेष थीं। सम्पन्नता में विपन्न जी रहीं अधमरी फसलें... अपुष्ट कुपोषित! कलकल छलछल बहती नदियों...
Scared Woman

स्वाति पांडेय की कविताएँ

विदा की आँच पर झोंक दी जातीं लड़कियाँ विदा की आँच पर झोंक दी जाती हैं अक्सर अपरिपक्वता की रेखा पर कूदती-फानती लड़कियाँ दुगुने-तिगुने उम्र की भट्ठी...
Rohit Thakur

एक मौसम को लिखते समय

मैं सही शब्दों की तलाश करूँगा लिखूँगा एक मौसम, एक सत्य कहने में दुःख का वृक्ष भी सूख जाता है घर जाने वाली सभी रेल विलम्ब से चल रही...
Manjula Bist

सिर्फ़ व सिर्फ़ अपने बारे में

पागल स्त्री की चीख़ पर कोई कान नहीं दे रहा है भटकते लोगों की बड़बड़ाहट का कोई अर्थ नहीं है संततियाँ पालकों से अधिक ऐप में...
Gaurow Gupta

प्रेम में – 2

मुझे विश्वास है एक रोज़ मैं मारा जाऊँगा— किसी युद्ध में नहीं प्रेम में प्रेम में मारा जाना दुनिया की सबसे अच्छी नियति है आप स्वर्ग और नरक नहीं जाते आप रहते...
Bhisham Sahni

माता-विमाता

पंद्रह डाउनलोड गाड़ी के छूटने में दो-एक मिनट की देर थी। हरी बत्ती दी जा चुकी थी और सिग्नल डाउनलोड हो चुका था। मुसाफ़िर अपने-अपने...
Farmer, Field

भयानक है छल : भाग-1

धूप तेज़ होने लगी थी आसमान में तैरने लगा हल्का-सा एक बादल सुदूर जंगल से घर लौटते हुए लकड़ी का गठ्ठर सिर पर उठाए तातप्पा के भीतर गहराता जा रही है अपनी...
Adarsh Bhushan

अमलदारी

इससे पहले कि अक्षुण्णताओं के रेखाचित्र ढोते अभिलेखागारों के दस्तावेज़ों में उलटफेर कर दी जाए, उन सारी जगहों की शिनाख़्त होनी चाहिए जहाँ बैठकर एक कुशल और समृद्ध समाज की कल्पनाओं के...
Prabhakar Machwe

प्रामाणिक अनुभूति (‘हरी घास पर क्षण भर’ : अज्ञेय)

'हरी घास पर क्षण भर' : अज्ञेय गेटे ने एक जगह लिखा है कि "आजकल के कवि अपनी स्याही में बहुत-सा पानी डाल देते हैं।" और...
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