गिरिराज किशोर

गिरिराज किशोर
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Recent Posts

God, Mother, Abstract

तारबंदी

जालियों के छेद इतने बड़े तो हों ही कि एक ओर की ज़मीन में उगी घास का दूसरा सिरा छेद से पार होकर साँस ले सके दूजी हवा में तारों की इतनी...
Adarsh Bhushan

कौन स्तब्ध है?

स्तब्धता एक बेजोड़ निकास है— सदियों से मुलाक़ातों, हादसों और प्रव्रजनों को देखते हुए हम स्तब्ध खड़े हैं नदियाँ देखकर बाँध स्तब्ध खड़े हैं गाड़ियाँ देखकर पुल तुम्हें देखकर...
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

ख़ानदान का सरग़ना कैसे बना

मुझे भय है कि मेरे ख़त कुछ पेचीदा होते जा रहे हैं। लेकिन अब ज़िन्दगी भी तो पेचीदा हो गई है। पुराने ज़माने में...
Indira Gandhi - Jawaharlal Nehru

खेती से पैदा हुई तब्दीलियाँ

अपने पिछले ख़त में मैंने कामों के अलग-अलग किए जाने का कुछ हाल बतलाया था। बिल्कुल शुरू में जब आदमी सिर्फ़ शिकार पर बसर...
Rag Ranjan

किसके घर में

एक दरवाज़ा है जो दो दुनियाओं को एक-दूसरे से अलग करता है इसके कम से कम एक ओर हमेशा अंधेरा रहता है घर से निकलते वक़्त...
Leaf Water River

नदी, स्वप्न और तुम्हारा पता

मैं जग रहा हूँ आँखों में गाढ़ी-चिपचिपी नींद भरे कि नींद मेरे विकल्पों की सूची में खो गयी है कहीं। जिस बिस्तर पर मैं लेटा चाहे-अनचाहे मेरी उपस्थिति...
Woman holding leaf

मिनाक्षी मिश्र की कविताएँ

अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुए अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुए मैंने जाना जब कोई धुन पहुँचती है गंतव्य तक सही-सलामत तब पैर थिरकने से पहले थिरकती है आत्मा जीवन...
Viren Dangwal

दुश्चक्र में स्रष्टा

कमाल है तुम्हारी कारीगरी का भगवान, क्या-क्या बना दिया, बना दिया क्या से क्या! छिपकली को ही ले लो, कैसे पुरखों की बेटी छत पर उलटा सरपट भागती छलती...
Amar Dalpura

काम, गंगाराम कुम्हार

काम मेरे पास दो हाथ हैं— दोनों काम के अभाव में तन से चिपके निठल्ले लटके रहते हैं! इस देश की स्त्रियों के पास इतने काम हैं— भोर से...
premchand

अनिष्ट शंका

चाँदनी रात, समीर के सुखद झोंके, सुरम्य उद्यान। कुँवर अमरनाथ अपनी विस्तीर्ण छत पर लेटे हुए मनोरमा से कह रहे थे— "तुम घबराओ नहीं,...
Shamser Bahadur Singh

ईश्वर अगर मैंने अरबी में प्रार्थना की

ईश्वर अगर मैंने अरबी में प्रार्थना की, तू मुझसे नाराज़ हो जाएगा? अल्लमह यदि मैंने संस्कृत में संध्या कर ली तो तू मुझे दोज़ख़ में डालेगा? लोग तो यही कहते...
Parveen Shakir

इतना मालूम है

अपने बिस्तर पे बहुत देर से मैं नीम-दराज़ सोचती थी कि वो इस वक़्त कहाँ पर होगा मैं यहाँ हूँ मगर उस कूचा-ए-रंग-ओ-बू में रोज़ की तरह...
premchand

पण्डित मोटेराम शास्त्री

पण्डित मोटेराम जी शास्त्री को कौन नहीं जानता! आप अधिकारियों का रुख़ देखकर काम करते हैं। स्वदेशी आन्दोलन के दिनों में आपने उस आन्दोलन...
Nude woman in dark

स्त्रियों के हिस्से का सुख

जब कि बरसों बाद स्त्रियों के हिस्से आया है पुरुषों के संग रहने का सुख तो फिर आँकड़े क्यूँ कह रहे हैं कि स्त्रियाँ सबसे अधिक उदास इन दिनों...
Holding Hands, Couple, Love, Together

साथ-साथ, जाड़े की एक शाम

साथ-साथ हमने साथ-साथ आँखें खोलीं, देखा बालकनी के उस पार उगते सूरज को, टहनी पर खिले अकेले गुलाब पर साथ-साथ ही पानी डाला, पीली पड़ चुकी पत्तियों को आहिस्ता से किया विलग, साथ-साथ देखी टीवी पर मिस्टर एण्ड मिसिज़...
Bharat Bhushan Agrawal

आने वालों से एक सवाल

तुम, जो आज से पूरे सौ वर्ष बाद मेरी कविताएँ पढ़ोगे तुम, मेरी धरती की नयी पौध के फूल तुम, जिनके लिए मेरा तन-मन खाद बनेगा तुम, जब मेरी...
Little Girl, Kid

बच्चा हँस रहा है

1 बच्चा हँस रहा है ठीक इसी वक़्त अमरीका ने किया है समुद्र के गर्भ में परमाणु परीक्षण ठीक इसी वक़्त फ़रमा रहे हैं ज़िया उल हक़ मैं ख़ुदा की मर्ज़ी से गद्दी...
Rain

ईश्वरीय चुम्बन

बारिश की भारी बूँदों से भयभीत झोपड़ी भीतर भागती है, एक मात्र तिरपाल के छेदों को ढकना उसकी आपातकालीन व्यवस्था है महल झरोखों से मुख निकाल आँखें मूँदकर बूँद-बूँद चूसता है यह उसका...
Maun Sonchiri - Pratibha Sharma

प्रेम का अबेकस

1 प्रेम को खोने के बाद सबसे मुश्किल है कैलेण्डर पर वर्ष गिनना और तारीख़ों के दिन दोहराना यह ऐसा है जैसे समय की आइसक्रीम में से स्कूप...
Kirti Chaudhary

मुझे मना है

बिखरा है रंग, रूप, गंध, रस मेरे आगे मुझे मना है किंतु गंध को अंग लगाना, ख़ुशियों के चमकीले दामन को आगे बढ़कर छू आना, रस पीना, छक जाना, लुब्ध...
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