लॉरेंस डरल

लॉरेंस डरल
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ब्रिटिश उपन्यासकार, कवि, नाटककार व यात्रा लेखक!

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Ambar Bahraichi

जगमगाती रौशनी के पार क्या था देखते

जगमगाती रौशनी के पार क्या था देखते धूल का तूफ़ाँ अंधेरे बो रहा था देखते सब्ज़ टहनी पर मगन थी फ़ाख़्ता गाती हुई एक शकरा पास ही...
Malkhan Singh

मुझे ग़ुस्सा आता है

मेरा माँ मैला कमाती थी बाप बेगार करता था और मैं मेहनताने में मिली जूठन को इकट्ठा करता था, खाता था। आज बदलाव इतना आया है कि जोरू मैला...
Bulbbul - a comment

सीता और काली की बाइनरी से अछूती नहीं है ‘बुलबुल’

मनोरंजन के 'तीसरे' परदे के रूप में उभरे नेटफ़्लिक्स पर आयी फ़िल्म 'बुलबुल' इन दिनों ख़ूब चर्चा में है। चर्चा का मुख्य विषय है...
Silent, Silence

इतिहास की कालहीन कसौटी

बन्‍द अगर होगा मन आग बन जाएगा, रोका हुआ हर शब्‍द चिराग़ बन जाएगा। सत्ता के मन में जब-जब पाप भर जाएगा झूठ और सच का सब अन्‍तर मिट जाएगा न्‍याय...
Waiting, Train, Girl, Window, Thinking, Alone, Lonely

बेटिकट

एक ट्रेन का सपना देखता हूँ मैं जो अतीत के किसी स्टेशन से छूटती है और बेतहाशा चलती चली जाती है समय की किसी अज्ञात दिशा में मैं सवार...
Javed Akhtar

मेले

बाप की उँगली थामे इक नन्हा-सा बच्चा पहले-पहल मेले में गया तो अपनी भोली-भाली कंचों जैसी आँखों से इक दुनिया देखी ये क्या है और वो क्या है सब उसने पूछा बाप...
Writing

समकालीन युवा लेखन पर कुछ विचार

जब भी कोई अनुभवी लेखक किसी युवा को सम्भावनाशील लेखक या कवि कहता है, वह यही बता रहा होता है कि आप एक रास्ते...
Ahmad Faraz

ख़्वाबों के ब्योपारी

हम ख़्वाबों के ब्योपारी थे पर इसमें हुआ नुक़सान बड़ा कुछ बख़्त में ढेरों कालक थी कुछ अब के ग़ज़ब का काल पड़ा हम राख लिए हैं झोली...
Agyeya

यूरोप की छत पर : स्विट्ज़रलैण्ड

दुनिया की नहीं तो यूरोप की छत : अपने पर्वतीय प्रदेश के कारण स्विटजरलैण्ड को प्रायः यह नाम दिया जाता था—किन्तु हिमालय को घर...
Dhoomil

बीस साल बाद

बीस साल बाद मेरे चेहरे में वे आँखें लौट आयी हैं जिनसे मैंने पहली बार जंगल देखा है: हरे रंग का एक ठोस सैलाब जिसमें सभी पेड़...
James Joyce

अरबी बाज़ार

Short Story: 'Araby' Writer: James Joyce अनुवाद: उपमा ऋचा लेखक परिचय: आयरलैण्ड के रचनाकार जेम्स जॉयस (1882-1941) ने सिर्फ़ कहानियाँ ही नहीं लिखीं, उपन्यास भी लिखे और साहित्य...
Abdul Bismillah

शरीफ़ लोग

पत्थर के कोयले से जो धुआँ उठता है उसमें एक शहर महकता है सुना है उस शहर में शरीफ़ लोग रहते हैं लेकिन शराफ़त का धुएँ से क्या नाता है यह समझ...
Old Woman

खुखड़ी

"अरे देखो रे रिंकिया... दिन दहाड़े वो बुढ़िया खुखड़ी चुरा कर भाग रही है, पकड़ो पकड़ो उसे... खुखड़ी छीन कर वापस रख लेना।" रिंकिया...
Mahesh Anagh

नहीं-नहीं, भूकम्प नहीं है

नहीं नहीं, भूकम्प नहीं है नहीं हिली धरती। सरसुतिया की छान हिली है कागा बैठ गया था फटी हुई चिट्ठी आयी है ठनक रहा है माथा सींक सलाई हिलती है सिंदूर माँग...
Adil Mansuri

सियाह चाँद के टुकड़ों को मैं चबा जाऊँ

सियाह चाँद के टुकड़ों को मैं चबा जाऊँ सफ़ेद सायों के चेहरों से तीरगी टपके उदास रात के बिच्छू पहाड़ चढ़ जाएँ हवा के ज़ीने से तन्हाइयाँ...
Nirmala Putul

तुम्हें आपत्ति है

तुम कहते हो मेरी सोच ग़लत है चीज़ों और मुद्दों को देखने का नज़रिया ठीक नहीं है मेरा आपत्ति है तुम्हें मेरे विरोध जताने के तरीक़े पर तुम्हारा मानना है कि इतनी...
Ishrat Afreen

मेनोपॉज़

अजीब-सी इत्तिला थी वो जिसे मैं ख़ुद से न जाने कब से छुपा रही थी अजब ख़बर थी कि जिसकी बाबत मैं ख़ुद से सच बोलते हुए...
Safia Akhtar, Jaan Nisar Akhtar

सफ़िया का पत्र जाँ निसार अख़्तर के नाम

भोपाल, 15 जनवरी, 1951 अख़्तर मेरे, पिछले हफ़्ते तुम्हारे तीन ख़त मिले, और शनीचर को मनीआर्डर भी वसूल हुआ। तुमने तो पूरी तनख़्वाह ही मुझे भेज दी... तुम्हें...
God, Mother, Abstract

पेटपोंछना

दराज़ में रखी नींद की गोलियों से भरी शीशी को मैंने फिर से देखा, थोड़ी देर देखता रहा... फिर धीरे से दराज़ बंद कर दी।...
Alok Dhanwa

भागी हुई लड़कियाँ

1 घर की ज़ंजीरें कितना ज़्यादा दिखायी पड़ती हैं जब घर से कोई लड़की भागती है क्या उस रात की याद आ रही है जो पुरानी फ़िल्मों में बार-बार आती थी जब...
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