मोहन श्रीवास्तव

मोहन श्रीवास्तव
1 POSTS 0 COMMENTS

STAY CONNECTED

32,144FansLike
10,637FollowersFollow
20,647FollowersFollow
618SubscribersSubscribe

Recent Posts

Madan Daga

रेखांकित हक़ीक़त

किसने कह दिया तुम्हें कि मैं कविता लिखता हूँ मैं कविता नहीं लिखता मैंने तो सिर्फ़ जन-मन के दर्द के नीचे एक रेखा खींच दी है हाँ, दर्द के नीचे फ़क़त...
Shamsher Bahadur Singh

तुमको पाना है अविराम

'टूटी हुई बिखरी हुई' से तुमको पाना है, अविराम सब मिथ्याओं में, ओ मेरी सत्य! मुझसे दूर अलग न जाओ। मुझको छोड़ न दो कहीं मुझको छोड़ न दो तुम्हें मेरे...
Ibne Insha

ये बातें झूठी बातें हैं

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलायी हैं तुम इंशा जी का नाम न लो क्या इंशा जी सौदाई हैं हैं लाखों रोग ज़माने में,...
Sushila Takbhore

खोज की बुनियाद

यह रहस्य तो नहीं खोज की बुनियाद है आज फिर मैं उड़ने लगी हूँ बे-पर बंजर ज़मीन पर फूटे हैं अंकुर आस की दूब चरने लगा है मन का मिरग किस दिशा से बांधोगे तुम इसे काल का...
Gender, Man, Woman, Transsexual

आत्मा का जेंडर

बात उस समय की है जब मैं एक ट्रेनिंग पर था। उस बैच में हम लोगों के साथ एक लेडी ऑफ़िसर भी थीं। क्लास...
Parveen Shakir

पूरा दुःख और आधा चाँद

पूरा दुःख और आधा चाँद हिज्र की शब और ऐसा चाँद दिन में वहशत बहल गई रात हुई और निकला चाँद किस मक़्तल से गुज़रा होगा इतना सहमा-सहमा चाँद यादों...
Gopaldas Neeraj

प्यार की कहानी चाहिए

आदमी को आदमी बनाने के लिए ज़िन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए और कहने के लिए कहानी प्यार की स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए। जो भी कुछ...
Godan

प्रेमचंद – ‘गोदान’

प्रेमचंद के उपन्यास 'गोदान' से उद्धरण | Quotes from Godan by Premchand   "लिखते तो वह लोग हैं, जिनके अंदर कुछ दर्द है, अनुराग है, लगन...
Agyeya

वेध्य

पहले मैं तुम्हें बताऊँगा अपनी देह का प्रत्येक मर्मस्थल फिर मैं अपने दहन की आग पर तपाकर तैयार करूँगा एक धारदार चमकीली कटार जो मैं तुम्हें दूँगा— फिर मैं अपने...
Khumar Barabankavi

इक पल में इक सदी का मज़ा हमसे पूछिए

इक पल में इक सदी का मज़ा हमसे पूछिए दो दिन की ज़िन्दगी का मज़ा हमसे पूछिए भूले हैं रफ़्ता-रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम क़िस्तों में ख़ुदकुशी...
Prabha Khaitan

तुम जानते हो

'अपरिचित उजाले' से तुम जानते हो मैंने तुम्हें प्यार किया है साहस और निडरता से मैं उन सबके सामने खड़ी हूँ जिनकी आँखें हमारे सम्बन्धों पर प्रश्नवाचक मक्खियों की तरह...
Taslima Nasrin

फिर देखेंगे

बुलाने पर भी जब नहीं आते कठिन बीमारी में एक दिन पकड़ लूँगी बिस्तर। ख़बर पाते ही जानती हूँ काग़ज़ों के जंगल में ढूँढोगे पासपोर्ट मिलते ही...
Kunwar Narayan

मामूली ज़िन्दगी जीते हुए

जानता हूँ कि मैं दुनिया को बदल नहीं सकता, न लड़कर उससे जीत ही सकता हूँ हाँ लड़ते-लड़ते शहीद हो सकता हूँ और उससे आगे एक शहीद का मक़बरा या एक...
Chandrakant Devtale

तुम वहाँ भी होंगी

अगर मुझे औरतों के बारे में कुछ पूछना हो तो मैं तुम्हें ही चुनूँगा तहक़ीक़ात के लिए यदि मुझे औरतों के बारे में कुछ कहना हो तो मैं...
Yashpal

चित्र का शीर्षक

जयराज जाना-माना चित्रकार था। वह उस वर्ष अपने चित्रों को प्रकृति और जीवन के यथार्थ से सजीव बना सकने के लिए, अप्रैल के आरम्भ...
Woman holding dhoop, light

दाह

दुःख भरे दिनों में वे गातीं उदासी के गीत सुख से लदे दिनों की धुन भी जाने क्यों उदास ही होती कामनाओं में लिपटी छोटी-छोटी प्रार्थनाएँ उनकी इच्छाओं...
Gardening, Soil, Planting

आज सुबह ही

आज सुबह ही मिट्टी खोदी घास उखाड़ी पानी डाला सुबह-सुबह की धूप देखकर सही जगह पर क़लम लगायी खीझ रहा था कई दिनों से मन के भीतर इस जीवन पर अस्थिर होकर घूम...
Mukut Bihari Saroj

सचमुच बहुत देर तक सोए

सचमुच बहुत देर तक सोए! इधर यहाँ से उधर वहाँ तक धूप चढ़ गई कहाँ-कहाँ तक लोगों ने सींची फुलवारी तुमने अब तक बीज न बोए! सचमुच बहुत देर...
Hungry, Poor

ग़ायब लोग

हम अक्षर थे मिटा दिए गए क्योंकि लोकतांत्रिक दस्तावेज़ विकास की ओर बढ़ने के लिए हमारा बोझ नहीं सह सकते थे हम तब लिखे गए जब जन गण मन लिखा...
Gender, Man, Woman, Transsexuality, Couple

जब कोई क्षण टूटता

वह मेरी सर्वत्रता था मैं उसका एकान्त— इस तरह हम कहीं भी अन्यत्र नहीं थे। जब कोई क्षण टूटता वहाँ होता एक अनन्तकालीन बोध उसके समयान्तर होने का मुझमें। जब कोई क्षण टूटता तब मेरा एकान्त आकाश नहीं एक छोटा-सा...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)