ख़्वाब में जिसने चिंगारियां संजोए रखे हैं,
उसके मुकद्दर में बुझे दिये रखे हैं।

रौशनी उसकी ज़ायदाद का हिस्सा है,
जिसके किस्से कहानियों में अंधेरे रखे हैं।

दोस्त, यार, राजदार, क्या क्या अफवाह है,
उसने तन्हाई को काफिले रहनुमा रखे हैं।

हर रात घनी अंधेरी हो ज़रूरी नहीं,
दिन ने भी हादसे कई देख रखे हैं।

Previous articleपश्चिम से लौटकर आने के बाद बड़ौदा में रहने की जगह नहीं मिली
Next articleकिस्मत और पुरुषार्थ
विवेक नाथ मिश्र
Vivek Nath Mishra's short stories have been published by The Hindu, Muse India, The Criterion, Queen mob's Teahouse, Prachya Review and many other magazines. His book 'Birdsongs of Love and Despair' is soon to be released.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here