जिस तरह मैं पढ़ लेती हूँ
तुम्हारा मौन
तुम क्यों नहीं पढ़ पाते
मौन मेरा
कौन रोकता है तुम्हें
मेरा मैं होना
या
तुम्हारा तुम?

***

अमनदीप/ विम्मी

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