गर्मी में अचानक नम हो गए
मौसम के लचीले काग़ज़ पर
अगली नई बदली के इश्तहार निकलेंगे
कर्क की दिशा में बढ़ते सूरज के दिनों
वर्षा के आगामी सीजन की ख़ातिर
नई बदली के रिलीज होने की
अग्रिम बुकिंग होगी
सूचना उन्हें है ख़ास तौर से
जो सूखे खेत-खलिहानों में
मनहूस मायूस बैठे हों
या जिनकी आँखें प्यासी हों
एक अरसे की प्यास से
या वे जो ऊब-ऊब गए से हैं
रंगमंच के लगातार एक ही जैसे रूपक से
और नए परिवर्तन के लिए
अकुला से उठे हों, सही में
रंगीन-दिल लोगों से निवेदन है
कि नई बदली की बिजली की पायल
एक बार-
बस, केवल एक बार ही सुनें
और नई बदली की पहली फुहार पर
उदघाटन-समारोह का मज़ा लें
गड़गड़ाहट की ताल पर लोग
बदली की बूंदों की
उंगलियों का थिरकन देखें
मौसम की तब्दीली के स्वरों पर
आधी गर्मी आधी बरसात की
नई बदली के अर्ध नारी पुरुष
नाचेंगे रंगमंच पर
तब नए जवान दर्शकों की हुल्लड़
निश्चित ही मचेगी वहाँ पर
तालियाँ तो पिटेंगी ही
हर्ष की सीटियाँ तक बजेंगी
और बड़े-बूढ़े
वर्षा रानी का छुकड़पन समझ इसे
अवहेलना करेंगे ही
फिर स्थानीय मौसम की समताल पर
एक और ही बदली
उछलेगी, कूदेगी और आकाश पर
नौसिखिया नर्तकी-सी
कभी तो एकदम द्रुतलय पर नाचती
और कभी बेमौक़े
बेसुरी विलम्बित हो चुप रह जाएगी
तब यारों रंग होगा- समाँ होगा
सामयिक हवाओं की ताल पर
अपेक्षाकृत प्रौढ़ अनुभवी बदलियों का
जो एक दिन ठहरेंगी
और तूफ़ान मचा कर चल देंगी
बदली नर्तकी का ‘क्लाईमेक्स’
अनुभव करोगे लोगों,
मानसून के स्थाई ताल, लयबद्ध नर्तन पर
जब भरी-पूरी बदली आ खड़ी होगी रंगमंच पर
मदमाता बाँकुरा, मज़ा लोगे तब छक कर
मानसून के अंग-प्रत्यंग के संचालन का
बेपर्द परिवर्तन और सधे-सधाए प्रदर्शन का
सुनोगे तब ‘आर्टीफ़ीशियल रेन’ की बदली
की बात लोगों,
जो पाश्चात्य विज्ञान के आर्केस्ट्रा पर
बाल-डांस किया करती है
और डालरों के निजी आमंत्रण पर
घर के आंगन में नाचती-थिरकती है
नई बदली की अग्रिम बुकिंग है अगले दिनों
लोग आएँ और अपनी सीट रिजर्व करा डालें।

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