रोटी पापी पेट का प्रथम पुण्य है
जो सर्वप्रथम धरती के हिस्से आता है
उसके बाद किसान के।

रोटी मनुष्य की रची कृपा है
जो गाय और कुत्ते जैसे कुछ ही
चौपायों के नसीब में आयी है
क्योंकि बाकी जानवरों ने कभी
साथ ही नहीं दिया आदमी का भूख में।

रोटी प्याज की तरह काटा गया
धरती का चकतीनुमा वो अंश है
तवे पर आते ही जिसकी साँसें फूल जाती हैं
रोटी ऐसा दर्द है जो थाली में गिरते ही
ज़बान तक रो पड़ती है।

रोटी जीवन की महक से भरा फूल है
जो हाथों की नरमी से ही फलता है
रोटी दैनिक तपस्या है मनुष्य के लिए
रोटी के लिए जलता रहा है सदियों से जिस्म
रोटी कभी जलनी नहीं चाहिए।

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राहुल बोयल
जन्म दिनांक- 23.06.1985; जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान) सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्यरत पुस्तक- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता - संग्रह) नष्ट नहीं होगा प्रेम ( कविता - संग्रह) मैं चाबियों से नहीं खुलता (काव्य संग्रह) ज़र्रे-ज़र्रे की ख़्वाहिश (ग़ज़ल संग्रह) मोबाइल नम्बर- 7726060287, 7062601038 ई मेल पता- [email protected]

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