Tag: Amrita Bharti

Woman in Tunnel, Silhouette

अपनी ही अन्यत्रता

मैं भाग रही हूँ।बाहर अँधेरा हो गया मेरे रास्तों पर पर अन्दर अब तक रोशनी नहीं हुई।स्मृति में दबी हुई आग को अलग कर रही हैं टूटी हुई टहनियों की तरह उँगलियाँऔर ठण्डी...
Couple, Love, Waves, Abstract

पहचान

या तो वह बहुत पास था या बहुत दूर और ये दोनों वहाँ नहीं थे जहाँ मैं थी।मानो मैं एक अन्तराय थी एक 'बीच'— एक परिचय उसके निकटतम होने का उसकी दूरस्थता कामानो मैं एक पहचान...
Abstract, woman

तुम कहाँ हो

तुम कहाँ हो?यहाँ नहीं वहाँ नहींशायद अन्दर हो पर हर कन्दरा के मुख पर भारी शिला का बोझ हैमैं भी यहाँ नहीं वहाँ नहीं शायद अन्दर हूँपर यह जो बाहर...
Woman in Tunnel, Silhouette

पुरुष-सूक्त : अँधेरे की ऋचा

वह एक समय था। मैं पहाड़ों से चाँदनी की तरह उतरा करती थी और मैदानों में नदी की तरह फैल जाती थी मेरे अन्दर हिम-संस्कृति की गरिमा...
Couple, Love, Waves, Abstract

जब कोई क्षण टूटता

वह मेरी सर्वत्रता था मैं उसका एकान्त— इस तरह हम कहीं भी अन्यत्र नहीं थे।जब कोई क्षण टूटता वहाँ होता एक अनन्तकालीन बोध उसके समयान्तर होने का मुझमें।जब कोई क्षण टूटता तब मेरा एकान्त आकाश नहीं एक छोटा-सा...

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Man lying on footpath, Homeless

तीन चित्र : स्वप्न, इनकार और फ़ुटपाथ पर लेटी दुनिया

1 हम मृत्यु-शैय्या पर लेटे-लेटे स्वप्न में ख़ुद को दौड़ता हुआ देख रहे हैंऔर हमें लगता है हम जी रहे हैं हम अपनी लकड़ियों में आग के...
Fair, Horse Ride, Toy

मेला

1 हर बार उस बड़ी चरखी पर जाता हूँ जो पेट में छुपी हुई मुस्कान चेहरे तक लाती है कई लोग साल-भर में इतना नहीं हँसते जितना खिलखिला लेते हैं...
Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
Upma Richa

या देवी

1सृष्टि की अतल आँखों में फिर उतरा है शक्ति का अनंत राग धूम्र गंध के आवक स्वप्न रचती फिर लौट आयी है देवी रंग और ध्वनि का निरंजन...
Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

किताब अंश: भारत के प्रधानमंत्री

सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
Muktibodh - Premchand

मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया

एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
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