Tag: Hindi kavita

Naveen Sagar

हम बचेंगे अगर (चाहिए)

एक बच्ची अपनी गुदगुदी हथेली देखती है और धरती पर मारती है। लार और हँसी से सना उसका चेहरा अभी इतना मुलायम है कि पूरी धरती अपने थूक के फुग्गे में उतारी...
Little Girl

अंकल, आई एम तिलोत्तमा!

'पहचान और परवरिश' कौन है ये? मेरी बिटिया है, इनकी भतीजी है, मट्टू की बहन है, वी पी साहब की वाइफ हैं, शर्मा जी की बहू है। अपने बारे में भी...
poem - k l saigal

परदेस में रहने वाले आ

यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि के. एल. सहगल एक कवि/शायर भी थे और निजी महफिलों में वे अपनी कविताएँ/छंद सुनाया भी...
Mangalesh Dabral

गर्मियों की शुरुआत

पास के पेड़ एकदम ठूँठ हैं वे हमेशा रहते आए हैं बिना पत्तों के हरे पेड़ काफी दूर दिखाई देते हैं जिनकी जड़ें हैं, जिनकी परछाईं हैं उन्हीं...
Kedarnath Agarwal

केदारनाथ अग्रवाल के कविता संग्रह ‘अपूर्वा’ से कविताएँ

केदारनाथ अग्रवाल के कविता संग्रह 'अपूर्वा' में उनकी 1968 से 1982 तक की कविताओं का संकलन है। इस कविता संग्रह को इसके प्रकाशित वर्ष...
Woman

तुम दिन भर करती क्या हो!

हमारे समाज में सदियों से एक स्त्री को लेकर आम जन की अवधारणाएं और अपेक्षाएं एक कुंठित सोच से घिरी रही हैं। पुरुष वर्ग...

‘क्योंकि मैं उसे जानता हूँ’ से कविताएँ

वेध्य पहले मैं तुम्हें बताऊँगा अपनी देह का प्रत्येक मर्मस्थल फिर मैं अपने दहन की आग पर तपा कर तैयार करूँगा एक धारदार चमकीली कटार जो मैं तुम्हें दूँगा फिर...
Kunwar Bechain

‘घर, माँ, पिता, पत्नी, पुत्र, बंधु!’ – कुँवर बेचैन की पाँच कविताएँ

कुँअर बेचैन हिन्दी की वाचिक परम्परा के प्रख्यात कवि हैं, जो अपनी ग़ज़लों, गीतों व कविताओं के ज़रिए सालों से हिन्दी श्रोताओं के बीच...
Phanishwarnath Renu

अपने ज़िले की मिट्टी से

कि अब तू हो गई मिट्टी सरहदी इसी से हर सुबह कुछ पूछता हूँ तुम्हारे पेड़ से, पत्तों से दरिया औ' दयारों से सुबह की ऊंघती-सी, मदभरी ठंडी...
Pray, Kid's Hand

धरती ने अपनी त्रिज्या समेटनी शुरू कर दी है

मेरी तबीयत कुछ नासाज़ है बस ये देखकर कि ये विकास की कड़ियाँ किस तरह हाथ जोड़े भीख मांग रही हैं मानवता के लिए मैं कहता हूँ कि बस परछाईयाँ...
Gaurav Adeeb

गौरव अदीब की कविताएँ

गौरव सक्सेना 'अदीब' बतौर स्पेशल एजुकेटर इंटरनेशनल स्कूल में कार्यरत हैं और थिएटर व शायरी में विशेष रुचि रखते हैं। दस वर्षों से विभिन्न...
Pankhuri Sinha

पंखुरी सिन्हा की कविताएँ

Poems by Pankhuri Sinha वही मुक़दमा है प्रेम पर लगभग वही मुक़दमा है प्रेम पर जो मेरी कविता पर दोनों को बताया जा रहा है नेगेटिव अँग्रेज़ी का एक...
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