Tag: Kedarnath Singh

Kedarnath Singh

फ़र्क़ नहीं पड़ता

हर बार लौटकर जब अन्दर प्रवेश करता हूँ मेरा घर चौंककर कहता है 'बधाई'ईश्वर यह कैसा चमत्कार है मैं कहीं भी जाऊँ फिर लौट आता हूँसड़कों पर परिचय-पत्र माँगा...
Kedarnath Singh

हक़ दो

फूल को हक़ दो—वह हवा को प्यार करे ओस, धूप, रंगों से जितना भर सके, भरे सिहरे, काँपे, उभरे और कभी किसी एक अँखुए की आहट पर पंखुड़ी-पंखुड़ी...
Kedarnath Singh

घास

दुनिया के तमाम शहरों से खदेड़ी हुई जिप्सी है वह तुम्हारे शहर की धूल में अपना खोया हुआ नाम और पता खोजती हुईआदमी के जनतन्त्र में घास के सवाल...
Kedarnath Singh

कुछ सूत्र जो एक किसान बाप ने बेटे को दिए

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/Zifr0G-vl2sमेरे बेटे कुँए में कभी मत झाँकना जाना पर उस ओर कभी मत जाना जिधर उड़े जा रहे हों काले-काले कौएहरा पत्ता कभी मत तोड़ना और अगर तोड़ना...
Kedarnath Singh

शब्द

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/B2DLpCaJqyQठण्ड से नहीं मरते शब्द वे मर जाते हैं साहस की कमी से कई बार मौसम की नमी से मर जाते हैं शब्दमुझे एक...
Kedarnath Singh

वह

इतने दिनों के बाद वह इस समय ठीक मेरे सामने हैन कुछ कहना न सुनना न पाना न खोना सिर्फ़ आँखों के आगे एक परिचित चेहरे का होनाहोना— इतना ही काफ़ी हैबस...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
Kedarnath Singh

सुई और तागे के बीच में

माँ मेरे अकेलेपन के बारे में सोच रही है पानी गिर नहीं रहा पर गिर सकता है किसी भी समय मुझे बाहर जाना है और माँ चुप है...
Kedarnath Singh

मेरी भाषा के लोग

मेरी भाषा के लोग मेरी सड़क के लोग हैं सड़क के लोग, सारी दुनिया के लोगपिछली रात मैंने एक सपना देखा कि दुनिया के सारे लोग एक बस...
Kedarnath Singh

चट्टान को तोड़ो, वह सुन्दर हो जाएगी

चट्टान को तोड़ो वह सुन्दर हो जाएगी उसे तोड़ो वह और, और सुन्दर होती जाएगीअब उसे उठा लो रख लो कन्धे पर ले जाओ शहर या क़स्बे में डाल दो...
Kedarnath Singh

यह पृथ्वी रहेगी

मुझे विश्वास है यह पृथ्वी रहेगी यदि और कहीं नहीं तो मेरी हड्डियों में, यह रहेगी जैसे पेड़ के तने में रहते हैं दीमक, जैसे दाने में रह लेता...
Kedarnath Singh

रास्ता

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/ldYv667Tmbsबगुले उड़े जा रहे थे नीचे चल रहे थे हम तीन जन तीन जन शहर से आए हुए क्वार की तँबियाई धूप में नहाए हुए...

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