Tag: Labor

Kedarnath Agarwal

मज़दूर का जन्म

एक हथौड़ेवाला घर में और हुआ!हाथी सा बलवान, जहाज़ी हाथों वाला और हुआ! सूरज-सा इंसान, तरेरी आँखोंवाला और हुआ!एक हथौड़ेवाला घर में और हुआ!माता रही विचार, अँधेरा हरनेवाला...
Labour, Labor

दिहाड़ी मज़दूर

मेरे गाँव में एक व्यक्ति के कई रूप थेवो खेतों में बोता था बादल और सबकी थालियों में फ़सल उगाता थावो शादियों में बन जाता था पनहारा, चीरता था लकड़ी मरणों...
Labour, Woman

घर लौटते मज़दूर

बड़े शहर से गांव लौटते मज़दूर कभी पूरा नहीं लौटते शहर में छोड़ कर आते हैं वो पुराने बरतन, फटी चटाई, स्टोव इसके साथ ही छूटे रह जाते...
Suryakant Tripathi Nirala

वह तोड़ती पत्थर

'Wah Todti Patthar', a poem by Suryakant Tripathi Niralaवह तोड़ती पत्थर! देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर- वह तोड़ती पत्थर।कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले...
Majaz Lakhnavi

मज़दूरों का गीत

मेहनत से ये माना चूर हैं हम आराम से कोसों दूर हैं हम पर लड़ने पर मजबूर हैं हम मज़दूर हैं हम, मज़दूर हैं हम गो आफ़त ओ...
Ankush Kumar

काम चालू है

उस कमरे में घना अंधेरा है लकड़ियों के उखड़े हुए फट्टे पड़े हैं इधर-उधर जिनमें धँसी हुई हैं कीलें जो पलक झपकते ही हो सकती हैं रक्तिम बिजली...
sardar puran singh

मज़दूर की मज़दूरी

आपने चार आने पैसे मज़दूर के हाथ में रखकर कहा - "यह लो दिन भर की अपनी मज़दूरी।"वाह क्या दिल्लगी है!

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