Tag: Motherhood

Baby, Mother, Parent, Father

एक किरण

माँ बनने से पहले कई बार माँ बनी थी तब, जब उम्मीद जगी थी तब भी जब बच्चा गुज़रा था तब, जब बाज़ार में टंगे छोटे कपड़ों को देख शरमाया था...
Mother, Son, Kid, Mom

लकिया-पकिया

माँ ने बेड की दराज में पड़ी अरोमा ऑयल की शीशी निकाल ली और बच्चे के हाथ-पैर-पीठ व पेट की तेल से मालिश कर दी और बोली, "सर! आपकी मालिश हो गयी, अब आप कैसा महसूस कर रहे हैं?"ग्राहक बना बच्चा बोला- "अहा मज़ा आ गया, मेरा तो पूरा दर्द ही छू-मंतर हो गया, बताइये कितने पैसे हुए?"
Ashok Chakradhar

मेमने ने देखे जब गैया के आँसू

(खेल में मग्न बच्चों को घर की सुध नहीं रहती) माता पिता से मिला जब उसको प्रेम ना, तो बाड़े से भाग लिया नन्हा सा मेमना। बिना...
Subhadra Kumari Chauhan

इसका रोना

यह कविता पता नहीं कितनी व्यवहारिक है लेकिन परंपरागत परिवारों में एक बच्चे के पालन-पोषण को लेकर माँ और पिता की गंभीरता और जिम्मेदारी में अंतर तो दिखाई देता है! हाँ, लेकिन साथ में यह देखना भी सुखद है कि आजकल पिता भी 'व्यवहार में माँ' बनने लगे हैं! :)
Mother Child

ममता

माँ की आँखें वो निश्छल, निर्गुण-सी आँखें आँख कहाँ होती है वो होती है एक पात्र जलमग्न अविरल जिसमें बहती है ममतामयी धारा और छलक आती है पल में मोती-सी पावन बूँदें जरा...

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Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
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मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
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मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
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नहीं है तुम्हारी देह में यह रुधिर जिसके वर्ण में अब ढल रही है दिवा और अँधेरा सालता हैरोज़ थोड़ी मर रही आबादियों में रोज़ थोड़ी बढ़ रही...
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कहानी: 'सातवाँ आदमी' लेखक: हारुकी मुराकामी जापानी से अनुवाद: क्रिस्टोफ़र एलिशन हिन्दी अनुवाद: श्रीविलास सिंह"वह मेरी उम्र के दसवें वर्ष के दौरान सितम्बर का एक अपराह्न था...
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कविता सरहदों के पार, हक़ीक़त के बीच दरार और कुछ बेतरतीब विचार

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Thaharti Sanson Ke Sirhane Se - Ananya Mukherjee

दुःख, दर्द और उम्मीद का मौसम (अनन्य मुखर्जी की कैंसर डायरी)

'ठहरती साँसों के सिरहाने से' अनन्या मुखर्जी की डायरी है जो उन्होंने 18 नवम्बर, 2018 को स्तन कैंसर से लड़ाई हार जाने से पहले...
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