Tag: Niki Pushkar

कहना चाहती हूँ

'Kehna Chahti Hoon', a poem by Niki Pushkar जब भी मैं कहती हूँ कि जो मन कहे, वही करना चाहिए मेरे मन की लालसाएँ आश्चर्य से मेरी ओर देखती...
Man outside a village home

अन्त-आरम्भ

'Ant-Aarambh', a poem by Niki Pushkar दुनिया गोल है हर अन्त के पश्चात आरम्भ है इस वृत्ताकार पथ पर चलते हुए हमें लौटना ही होगा फिर वहीं, जहाँ से...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)