Tag: Niki Pushkar

घरेलू औरतें

निकी पुष्कर की कविता 'घरेलु औरतें' | 'Gharelu Auratein', a poem by Niki Pushkar बड़ी आम सी होती हैं, ये घरेलू औरतें बड़ी आम सी होती है, इनकी...

आमद

'Aamad', a poem by Niki Pushkar इतने बेखटके आने का प्रयोजन...? कोई सम्बोधन, एक पुकार तो लगाते इतनी चुप आमद पर कोई कैसे सतर्क होता मुझे ज़रा भी भान न...

परदा

'Parda', a poem by Niki Pushkar ख़ूबसूरत अदाकारा सुनहरी चकाचौंध से सराबोर उसकी एक मुस्कान पर हज़ारों, लाखों युवा दिल क़ुर्बान हैं उसके निभाए एक-एक सशक्त किरदार नवयुवतियों के लिए हैं प्रेरणा-श्रोत परदे पर, जिसे...

रंगत

'Rangat', a poem by Niki Pushkar गहरे साँवले रंग की लड़की वयस्क होने तक डूब चुकी होती है, रंग के गहरेपन में बचपन से रंगभेदी टिप्पणियों को सहते-झेलते ख़ूब जान चुकी होती...

मन-मौसम

'Man Mausam', a poem by Niki Pushkar इन दिनों खिला-खिला सा है अनन्त बीती ऋतु में, ख़ूब दम घोंटा काले मेघों ने अब शरद ने भय-मुक्त किया है उसे अन्तसतल से...

छल

'Chhal', a poem by Niki Pushkar तुम पर जब दर्शायी जा रही थी, झूठी विवशता तुम समझ रहे थे प्रवंचना, और फिर भी मौन थे वस्तुतः तुम छल रहे...

समय, उम्र, मन

'Samay, Umr, Man', a poem by Niki Pushkar समय उम्र को जीवन की मुख्य सड़क पर आगे कहीं और आगे ले जाता रहा और मन... वहीं, तरुणाई की पगडण्डियों पर विचरता रह...

पहाड़

'Pahaad', a poem by Niki Pushkar देश जवान है और मेरे पहाड़ पर बुढ़ौती छायी है गाँव सूने पड़े हैं घर के छज्जे जर-जर हुए जाते हैं दो जून का...

दीवार और गलियाँ

'Deewar Aur Galiyaan', a poem by Niki Pushkar अभी वो दोनों मिले ही थे कि उनकी घरों की दीवारें ऊँची होने लगीं और शहर की गलियाँ तंग, दीवारों के...

कुलटा

'Kulta', a poem by Niki Pushkar चूँकि, स्त्री देह में जन्म लिया था इसलिए, उपहार में मिलीं उसे ढेर सारी हिदायतें... 'परदे में रहना' 'ऊँचा न बोलना' कोई कुछ भी कहे, 'पलटकर जवाब न देना' 'कभी तर्क...

प्रेम-नियति

'Prem Niyati', a poem by Niki Pushkar किसी का प्रेम स्वीकार करना किसी से प्रेम हो जाना दो पृथक घटनाएँ हैं कई दफ़े सुरक्षित भविष्य की प्रत्याभूति पर प्रेम...
Middle Age Love, Couple walking holding hands on railway tracks

गूँगे का गुड़

'Goonge Ka Gud', a poem by Niki Pushkar पकी देह में कच्चा मन रहता है, संकोच, लिहाज़, मर्यादा सब के सब योग्यता की परीक्षा पर प्रतिपल तत्पर बैठे होते हैं, वाणी बन्दी...
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