Tag: Oppression
कह दो, क्या यह नहीं किया है?
निज वैभव के बल से तुमने—
कह दो,
क्या यह नहीं किया है?
मानव से मैला ढुलवाकर
उसे पशु से हीन समझकर
तिरस्कार कर नित ठुकराकर
क्या अछूत तक नहीं...
शोषक रे अविचल!
शोषक रे अविचल!
शोषक रे अविचल!
अजेय! गर्वोन्नत प्रतिपल!
लख तेरा आतंक त्रसित हो रहा धरातल!
भार-वाहिनी धरा,
किन्तु तुमको ले लज्जित!
अरे नरक के कीट!, वासना-पंक-निमज्जित!
मृत मानवता के अधरों...

