Tag: Prison

Dushyant Kumar

क़ैद परिंदे का बयान

तुमको अचरज है—मैं जीवित हूँ! उनको अचरज है—मैं जीवित हूँ! मुझको अचरज है—मैं जीवित हूँ!लेकिन मैं इसीलिए जीवित नहीं हूँ— मुझे मृत्यु से दुराव था, यह जीवन जीने...
Nelson Mandela

नेल्सन मंडेला

छोटी-सी जगह से बड़े-बड़े सपने देखे जा सकते हैं उसने बचपन में पिता से सुनी थी यह बात तभी तो उसने देखा था जेल की आठ बाई सात की...
Vijaydev Narayan Sahi

दीवारें

जिस दिन हमने तोड़ी थीं पहली दीवारें, (तुम्हें याद है?) छाती में उत्साह कंठ में जयध्वनियाँ थीं। उछल-उछलकर गले मिले थे, फिरे बाँटते बड़ी रात तक हम बधाइयाँ। काराघर में फैल...
Vijay Rahi

जेल

'Jail', a poem by Vijay Rahiमैं जानता था पर कितना कम जानता था कि जेल सिर्फ़ एक कोठरी का नाम है।बचपन में गाँव के हमारे जैसे बच्चों...

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Jeete Jee Allahabad - Mamta Kalia

किताब अंश: ‘जीते जी इलाहाबाद’

'जीते जी इलाहाबाद' ममता कालिया की एक संस्‍मरणात्‍मक कृ‌ति है, जिसमें हमें अनेक उन लोगों के शब्दचित्र मिलते हैं जिनके बिना आधुनिक हिन्दी साहित्य...
Tumhari Kshay - Rahul Sankrityayan

राहुल सांकृत्यायन – ‘तुम्हारी क्षय’

राहुल सांकृत्यायन की किताब 'तुम्हारी क्षय' से उद्धरण | Quotes from 'Tumhari Kshya', a book by Rahul Sankrityayan चयन: पुनीत कुसुम   "उन्हीं के ख़ून से मोटी...
Rahul Sankrityayan

तुम्हारी जोंकों की क्षय

जोंकें? — जो अपनी परवरिश के लिए धरती पर मेहनत का सहारा नहीं लेतीं। वे दूसरों के अर्जित ख़ून पर गुज़र करती हैं। मानुषी...
Gaurav Bharti

कविताएँ: सितम्बर 2021

हादसा मेरे साथ प्रेम कम उसकी स्मृतियाँ ज़्यादा रहींप्रेम जिसका अन्त मुझ पर एक हादसे की तरह बीता मुझे उस हादसे पर भी प्रेम आता है। गंध मैं तुम्हें याद करता हूँ दुनिया...
Ravit Yadav

कुछ दूर चलते ही

घर में आख़िरी रात। समान लगाने की प्रक्रिया में भावनाओं को रोकना एक मुश्किल काम है। भावनाएँ जो इतने दिन दिल्ली में रहने से...
Leaves, Leaf, Difference, Different but same

व्याकरण

मेरे शरीर का व्याकरण अलग है सारे वाक्य तितर-बितर हैं पूर्ण-विराम असमय आ जाता है भूत वर्तमान भविष्य सब एक से है जहाँ संधि की ज़रूरत है वहाँ विच्छेद...
Ek Desh Barah Duniya - Shirish Khare

‘एक देश बारह दुनिया’ : हाशिए पर छूटे भारत की तस्वीर

पुस्तक: 'एक देश बारह दुनिया : हाशिए पर छूटे भारत की तस्वीर' लेखक: शिरीष खरे प्रकाशक: राजपाल एण्ड संससमीक्षा/टिप्पणी: आलोक कुमार मिश्रासंविधान में लिखा है— 'इंडिया...
Pramod Ranjan - Pankaj Pushkar

भाषायी असमानता को हमारे शिक्षण-संस्थान जन्म दे रहे हैं

'भाषायी असमानता को हमारे शिक्षण-संस्थान जन्म दे रहे हैं' : प्रमोद रंजन से पंकज पुष्कर की बातचीत पंकज पुष्कर: जन्म से लेकर अब तक आपकी...
Ek Bata Do - novel by Sujata

समीक्षा: ‘एक बटा दो’

किताब: 'एक बटा दो' लेखिका: सुजाता प्रकाशक: राजकमल प्रकाशनसमीक्षा/टिप्पणी: महेश कुमार स्त्री निर्मिति की विभिन्न चरणों की पड़ताल करके उससे बाहर निकलने का स्त्रीवादी विश्लेषण है 'एक...
Vijendra

कवि

मेरे लिए कविता रचने का कोई ख़ास क्षण नहीं। मैं कोई गौरय्या नहीं जो सूर्योदय और सूर्यास्त पर घौंसले के लिए चहचहाना शुरू कर दूँ।समय ही ऐसा है कि मैं...
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