Tag: Raushniyaan
रोटी
रोज़ सवेरे ऑफिस जाते वक़्त
ट्रैफिक की लाल बत्ती पर गाड़ी रुकती थी
रोज़ देखती थी मैं
उस भीड़ में ज़िन्दगी से ज़द्दोज़हद करते लोगों को
कहीं ऑटो...
जब सोच रही थी मैं एक नज़्म
जब सोच रही थी मैं एक नज़्म
वो निकल गई बराबर से
नाराज़गी से मुझे देखती
तवज्जोह नहीं दे सकी मैं
उनकी दानिश-मंदाना बातों पर
पढ़ा तारीख़ गुज़रने के...
दो ज़िंदगियाँ
हम दो ज़िंदगियां जी रहे हैं
एक वो जो तुम देख रहे हो
हमें अच्छे कपड़े पहन कर घूमते हुए
हंसते मुस्कुराते हुए
एक वो, जो हम सह...
सिंड्रेला
सुनो लड़की!
इस बार कोयले की राख को पेशानी पर रगड़ लेना
हालात की सौतेली बहनों से समझौता तुम कर लेना
नहीं आएगी परी कोई तुम्हारा मुस्तक़बिल...
मेघदूत
सनसनाहटों के साथ
गड़गड़ाहटो के साथ
आ गया
पवन रथ पे बैठ कर
मेरा मेघ देवता
दोश पर हवाओं के
बाल उड़ाता हुआ
उसका जामुनी बदन
आसमाँ पे छा गया
दूर तक गरज...
ये वो धरती नहीं है
नहीं ये वो धरती नहीं है
नहीं ये वो धरती नहीं है जहाँ मेरा बचपन
मेरा तितलीयों, फूलों, रंगों से लबरेज़ बचपन
किसी शाहज़ादी की रंगीं कहानी...
क़ैद में रक़्स
सब के लिए ना-पसंदीदा उड़ती मक्खी
कितनी आज़ादी से मेरे मुँह और मेरे हाथों पर बैठती है
और इस रोज़-मर्रा से आज़ाद है जिस में मैं...
एक पुरानी कहानी
किसी शहर में इक कफ़न चोर आया
जो रातों को क़ब्रों में सूराख़ करके
तन ए कुश्तगां से कफ़न खींच लेता
आख़िर ए कार पकड़ा गया
और उसको...







