Tag: Religious Riots

Manto

शरीफ़न

जब क़ासिम ने अपने घर का दरवाज़ा खोला तो उसे सिर्फ़ एक गोली की जलन थी जो उसकी दाहिनी पिंडली में गड़ गई थी,...
Topi Shukla - Rahi Masoom Raza

राही मासूम रज़ा – ‘टोपी शुक्ला’

प्रस्तुति: पुनीत कुसुम  "मुझे यह उपन्यास लिखकर कोई ख़ुशी नहीं हुई।"   "समय के सिवा कोई इस लायक़ नहीं होता कि उसे किसी कहानी का हीरो बनाया...
Swapnil Tiwari

अपनी केवल धार

"जब तक इंसान खाना खाएगा, तब तक उसको तीन चीज़ों की ज़रूरत रहेगी ही। खाने की, आग की और चाक़ू की। खाना किसान उगाता...
Saadat Hasan Manto

मोज़ील

सआदत हसन मंटो की कहानी 'मोज़ील' | 'Mozeel', a story by Saadat Hasan Mantoत्रिलोचन ने पहली बार, चार वर्षों में पहली बार, रात को...
Civilization, Updesh, Play, Culture, King, War, Warrior

हस्तिनापुर के सैनिक

'Hastinapur Ke Sainik', a poem by Nirmal Guptहस्तिनापुर से गए थे सैनिक कुरुक्षेत्र के मैदान में, वहाँ जाने का मक़सद और ज़िन्दा बचे रहने की उम्मीद लिए बिना, हालाँकि...

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RECENT POSTS

Uski Roti - Mohan Rakesh

उसकी रोटी

बालो को पता था कि अभी बस के आने में बहुत देर है, फिर भी पल्ले से पसीना पोंछते हुए उसकी आँखें बार-बार सड़क...
Abstract, Time

चींटी और मास्क वाले चेहरे

स्वप्न में दिखती है एक चींटी और मास्क वाले चेहरे चींटी रेंगती है पृथ्वी की नाल के भीतर मास्क वाले चेहरे घूमते हैं भीड़ मेंसर से...
Abstract, Woman

जीवन सपना था, प्रेम का मौन

जीवन सपना था आँखें सपनों में रहीं और सपने झाँकते रहे आँखों की कोर से यूँ रची हमने अपनी दुनिया जैसे बचपन की याद की गईं कविताएँ हमारा दुहराया...
Kedarnath Singh

फ़र्क़ नहीं पड़ता

हर बार लौटकर जब अन्दर प्रवेश करता हूँ मेरा घर चौंककर कहता है 'बधाई'ईश्वर यह कैसा चमत्कार है मैं कहीं भी जाऊँ फिर लौट आता हूँसड़कों पर परिचय-पत्र माँगा...
Naveen Sagar

वह मेरे बिना साथ है

वह उदासी में अपनी उदासी छिपाए है फ़ासला सर झुकाए मेरे और उसके बीच चल रहा हैउसका चेहरा ऐंठी हुई हँसी के जड़वत् आकार में दरका है उसकी आँखें बाहर...
Nurit Zarchi

नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’

नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
Naresh Mehta

कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
Vishesh Chandra Naman

मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
Gaurav Bharti

कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
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