Tag: Sadness

Gaurav Bharti

नैराश्य, समय का शोक-गीत

नैराश्य जो मुझे भूल गए मैंने उन्हें भी याद रखा जिन्होंने मुझे याद किया उनके लिए दुआएँ माँगीं मैंने ख़ूब किया इंतज़ार शजर की तरह फिर एक दिन चिड़िया बन...
Sadness, Melancholy

आषाढ़ की भरी दोपहरी में लिखी एक उदास कविता

दर्द याद रहता है ख़ुशी गुम हो जाती है दंश विस्मृत नहीं होता स्पर्श में से बचा रह जाता है उतना हिस्सा जो रह जाता है उँगलियों पर चिपककर। भूख...
Venu Gopal

वे हाथ होते हैं

दुश्मनों की ख़ुशी पर मुझे कुछ नहीं कहना है। दोस्तों की उदासी ही मुझसे यह कविता लिखवा रही है। जिन अँधेरे रास्तों पर सफ़र शुरू हुआ था, वे एकाएक राज-पथ...
Leeladhar Jagudi

दुःख की बात

निरर्थकताओं को सार्थकताओं में बदलने के लिए हम संघर्ष करते हैं बदहालियों को ख़ुशहालियों में बदलने के लिए हम संघर्ष करते हैं क्योंकि कमियाँ जब अभाव बन जाती...
Eye, Wall Art, Grief, Sadness

आश्रय

'Ashraya', Hindi Kavita by Rashmi Saxena नमी खोखला कर देती है भीतर तक, दीवार की हो काठ की हो अथवा हो आत्मा की मन की दीवार पर दुःख द्वारा लगायी सेंध से रिसता...
Prabhat Milind

क़िस्से से बाहर होने का दुःख

'Qisse Se Bahar Hone Ka Dukh', Hindi Kavita by Prabhat Milind जो कभी व्यक्त नहीं हो पाया दुःख से बड़ा दुःख, यही दुःख था अब तलक दिखने...
Sadness, Grief, Painting, Woman

विचित्र आकर्षण

दुख में कितना आकर्षण है! ये जानता है एक चित्रकार, उठाता है जब वो रंग रंग देता है गरीबी, भूखमरी कंकाल देह, तरसते नयन। दुख में गजब का सम्मोहन...

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Recent Posts

Balli Singh Cheema

रोटी माँग रहे लोगों से

रोटी माँग रहे लोगों से किसको ख़तरा होता है? यार सुना है लाठी-चारज, हल्का-हल्का होता है। सिर फोड़ें या टाँगें तोड़ें, ये क़ानून के रखवाले, देख रहे हैं...
Sushant Supriye - Daldal

क़िस्सागोई का कौतुक देती कहानियाँ

समीक्ष्य कृति: दलदल (कहानी संग्रह) (अंतिका प्रकाशन, ग़ाज़ियाबाद) टिप्पणी: सुषमा मुनीन्द्र 1 सुपरिचित रचनाकार सुशांत सुप्रिय का सद्यः प्रकाशित कथा संग्रह ‘दलदल’ ऐसे समय में आया है...
Naked Lady, Crouching Nude, Woman

कविताएँ: दिसम्बर 2020

लड़कियों का मन कसैला हो गया है इन दिनों लड़कियों का मन कसैला हो गया है अब वह हँसती नहीं दुपट्टा भी लहराती नहीं अब झूला झूलती नहीं न ही...
Man sitting seaside, Beach, Water

मेरे देखने से, प्रेम में असफल लड़के पर कविता

मेरे देखने से मैंने देखा तो नीला हो गया आकाश, झूमने लगे पीपल के चमकते हरे पत्ते। मैंने देखा तो सफ़ेद बर्फ़ से ढँका भव्य पहाड़ एकदम से उग आया क्षितिज पर। मैंने...
Fight, Oppression, Beating

कायरों का गीत

शोर करोगे! मारेंगे बात कहोगे! मारेंगे सच बोलोगे! मारेंगे साथ चलोगे! मारेंगे ये जंगल तानाशाहों का इसमें तुम आवाज़ करोगे? मारेंगे... जो जैसा चलता जाता है, चलने दो दीन-धरम के नाम...
Dictatorship

क्या तानाशाह जानते हैं

क्या तानाशाह जानते हैं कि मुसोलिनी के ज़हर उगलने वाले मुँह में डाला गया था मरा हुआ चूहा एक औरत ने सरेआम स्कर्ट उठाकर मूत दिया था मुसोलिनी के मुँह पर लटकाया...
Shrikant Verma

सूर्य के लिए

गहरे अँधेरे में, मद्धिम आलोक का वृत्त खींचती हुई बैठी हो तुम! चूल्हे की राख-से सपने सब शेष हुए। बच्चों की सिसकियाँ भीतों पर चढ़ती छिपकलियों सी बिछल गईं। बाज़ारों के सौदे जैसे जीवन के...
Ashok Vajpeyi

हाथ

1 यह सुख भी असह्य हो जाएगा यह पूरे संसार का जैसे एक फूल में सिमटकर हाथ में आ जाना यह एक तिनके का उड़ना घोंसले का सपना बनकर आकाश में यह...
Viren Dangwal

कैसी ज़िन्दगी जिए

एक दिन चलते-चलते यों ही ढुलक जाएगी गर्दन सबसे ज़्यादा दुःख सिर्फ़ चश्मे को होगा, खो जाएगा उसका चेहरा अपनी कमानियों से ब्रह्माण्ड को जैसे-तैसे थामे वह भी चिपटा रहेगा...
Periyar Books in Hindi

पेरियारः प्रेरणा और प्रयोजन

पेरियारः प्रेरणा और प्रयोजन कृपाशंकर चौबे बहुजन साहित्य की अवधारणा को सैद्धान्तिक आधार देनेवाले प्रमोद रंजन ने समाज सुधार आन्दोलन के पितामह पेरियार ई.वी. रामासामी (17...
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