Tag: Sarveshwar Dayal Saxena

Sarveshwar Dayal Saxena

तुमसे अलग होकर

तुमसे अलग होकर लगता है अचानक मेरे पंख छोटे हो गए हैं, और मैं नीचे एक सीमाहीन सागर में गिरता जा रहा हूँ। अब कहीं कोई यात्रा नहीं...
Sarveshwar Dayal Saxena

तुम्हारे साथ रहकर

'Tumhare Sath Rehkar', a poem by Sarveshwar Dayal Saxena तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गयी हैं, हर रास्ता छोटा हो...
Sarveshwar Dayal Saxena

चलो घूम आएँ

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/Ji6Xm0Inkus उठो, कब तक बैठी रहोगी इस तरह अनमनी चलो घूम आएँ। तुम अपनी बरसाती डाल लो मैं छाता खोल लेता हूँ बादल— वह तो भीतर बरस रहे...
Sarveshwar Dayal Saxena

तुम्हारे लिए

काँच की बन्द खिड़कियों के पीछे तुम बैठी हो घुटनों में मुँह छिपाए, क्या हुआ यदि हमारे-तुम्हारे बीच एक भी शब्द नहीं। मुझे जो कहना है कह जाऊँगा यहाँ...
Sarveshwar Dayal Saxena

नये साल की शुभकामनाएँ

नये साल की शुभकामनाएँ! खेतों की मेड़ों पर धूल भरे पाँव को कुहरे में लिपटे उस छोटे से गाँव को नये साल की शुभकामनाएँ! जाँते के गीतों को,...
Sarveshwar Dayal Saxena

कितना अच्छा होता है

एक-दूसरे को बिना जाने पास-पास होना और उस संगीत को सुनना जो धमनियों में बजता है, उन रंगों में नहा जाना जो बहुत गहरे चढ़ते-उतरते हैं। शब्दों की खोज शुरू होते...
Sarveshwar Dayal Saxena

पोस्टमार्टम की रिपोर्ट

यह कविता हिन्दी की छोटी लेकिन सबसे सशक्त कविताओं में से एक है! समाज में गरीब होना तक कितना बड़ा अपराध बन जाता है, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ने केवल चार पंक्तियों में बता दिया है.. पढ़िए! :)
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