Tag: Sarveshwar Dayal Saxena

Sarveshwar Dayal Saxena

दिवंगत पिता के प्रति

1सूरज के साथ-साथ सन्ध्या के मंत्र डूब जाते थे, घण्टी बजती थी अनाथ आश्रम में भूखे भटकते बच्चों के लौट आने की, दूर-दूर तक फैले खेतों पर, धुएँ में...
Sarveshwar Dayal Saxena

अक्सर एक व्यथा

अक्सर एक गन्ध मेरे पास से गुज़र जाती है, अक्सर एक नदी मेरे सामने भर जाती है, अक्सर एक नाव आकर तट से टकराती है, अक्सर एक लीक दूर पार से...
Sarveshwar Dayal Saxena

अन्त में

अब मैं कुछ कहना नहीं चाहता, सुनना चाहता हूँ एक समर्थ सच्ची आवाज़ यदि कहीं हो।अन्यथा इससे पूर्व कि मेरा हर कथन हर मंथन हर अभिव्यक्ति शून्य से टकराकर फिर वापस लौट...
Sarveshwar Dayal Saxena

देशगान

क्या ग़ज़ब का देश है, यह क्या ग़ज़ब का देश है। बिन अदालत औ मुवक्किल के मुक़दमा पेश है। आँख में दरिया है सबके दिल में है...
Sarveshwar Dayal Saxena

देश काग़ज़ पर बना नक़्शा नहीं होता

यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रही...
Sarveshwar Dayal Saxena

कोट

खूँटी पर कोट की तरह एक अरसे से मैं टँगा हूँ कहाँ चला गया मुझे पहनकर सार्थक करने वाला?धूल पर धूल इस क़दर जमती जा रही है कि अब...
Sarveshwar Dayal Saxena

सूरज को नहीं डूबने दूँगा

अब मैं सूरज को नहीं डूबने दूँगा। देखो मैंने कंधे चौड़े कर लिए हैं मुट्ठियाँ मज़बूत कर ली हैं और ढलान पर एड़ियाँ जमाकर खड़ा होना मैंने सीख लिया...
Sarveshwar Dayal Saxena

पत्नी की मृत्यु पर

बायें हाथ में ले अपना कटा हुआ दाहिना हाथ बैठा हूँ मैं घर के उस कोने में जिसे तुम्हारी मौत कितनी सफ़ाई से ख़ाली कर गयी है।अब यहाँ...
Sarveshwar Dayal Saxena

प्यार

इस पेड़ में कल जहाँ पत्तियाँ थीं आज वहाँ फूल हैं, जहाँ फूल थे वहाँ फल हैं, जहाँ फल थे वहाँ संगीत के तमाम निर्झर झर रहे हैं, उन निर्झरों में जहाँ शिलाखण्ड थे वहाँ चाँद...
Sarveshwar Dayal Saxena

कोई मेरे साथ चले

मैंने कब कहा कोई मेरे साथ चले चाहा ज़रूर!अक्सर दरख़्तों के लिए जूते सिलवा लाया और उनके पास खड़ा रहा, वे अपनी हरीयाली अपने फूल-फूल पर इतराते अपनी चिड़ियों में उलझे रहेमैं...
Sarveshwar Dayal Saxena

एक छोटी-सी मुलाक़ात

'Ek Chhoti Si Mulaqat', a poem by Sarveshwar Dayal Saxenaकुछ देर और बैठो अभी तो रोशनी की सिलवटें हैं हमारे बीच।शब्दों के जलते कोयलों की आँच अभी...
Sarveshwar Dayal Saxena

देह का संगीत

मूझे चूमो और फूल बना दो, मुझे चूमो और फल बना दो, मुझे चूमो और बीज बना दो, मुझे चूमो और वृक्ष बना दो, फिर मेरी छाँह में बैठ रोम-रोम जुड़ाओ।मुझे चूमो हिमगिरि...

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