गिरिजा कुमार माथुर

गिरिजा कुमार माथुर
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गिरिजा कुमार माथुर (२२ अगस्त १९१९ - १० जनवरी १९९४) का जन्म म०प्र० के अशोक नगर में हुआ। वे एक कवि, नाटककार और समालोचक के रूप में जाने जाते हैं।

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Woman in front of a door

सुबह

कितना सुन्दर है सुबह का काँच के शीशों से झाँकना इसी ललछौंहे अनछुए स्पर्श से जागती रही हूँ मैं बचपन का अभ्यास इतना सध गया है कि आँखें खुल ही जाती...
Rohit Thakur

सोलेस इन मे

कौन आएगा मई में सांत्वना देने कोई नहीं आएगा समय ने मृत्यु का स्वांग रचा है अगर कोई न आए तो बारिश तुम आना आँसुओं की तरह दो-चार बूँदों की...
Fist, Protest, Dissent

एक छोटी-सी लड़ाई

मुझे लड़नी है एक छोटी-सी लड़ाई एक झूठी लड़ाई में मैं इतना थक गया हूँ कि किसी बड़ी लड़ाई के क़ाबिल नहीं रहा। मुझे लड़ना नहीं अब— किसी...
Saadat Hasan Manto

मंटो

मंटो के मुताल्लिक़ अब तक बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है। उसके हक़ में कम और ‎ख़िलाफ़ ज़्यादा। ये तहरीरें अगर पेश-ए-नज़र...
Sahir Ludhianvi

ख़ून फिर ख़ून है

ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जाएगा ख़ाक-ए-सहरा पे जमे या कफ़-ए-क़ातिल पे जमे फ़र्क़-ए-इंसाफ़ पे...
Rahul Boyal

इन स्मृतियों को सहेज लो

"इन स्मृतियों को सहेज लो, एक दिन ये कहीं अधिक दीप्त होंगी" इतना ही कहा था तुमने और मुझे वक़्त की बेरहमी का अंदाज़ा हो गया इसलिए जितना...
Woman, Abstract

भरोसा

उन्होंने ही किया सर्वाधिक दोहन भरोसे का जिनकी शिराओं में सभ्यताओं की रसोई का नमक घुला था पुरखों की कही ये सूक्ति स्मरण करती हूँ बार-बार पर...
Mahtem Shiferraw

मेहतम शिफ़ेरा की कविता ‘धूल एवं अस्थियाँ’

मेहतम शिफ़ेरा (Mahtem Shiferraw) इथियोपिया और इरिट्रिया की एक लेखक और दृश्य कलाकार हैं। वह Your Body Is War (यूनिवर्सिटी ऑफ़ नेब्रास्का, 2019) और...
Algoze Ki Dhun Par - Divya Vijay

‘अलगोज़े की धुन पर’ : प्रेम के परिपक्व रंगों की कहानियाँ

किताब: 'अलगोज़े की धुन पर' लेखिका: दिव्या विजय टिप्पणी: देवेश पथ सारिया अभी किण्डल पर दिव्या विजय का पहला कहानी संग्रह 'अलगोज़े की धुन पर' पढ़कर समाप्त...
Naveen Sagar

हो सकता था

इतनी बड़ी दुनिया में कहीं जा नहीं रहा हूँ भीतर और बाहर जगहें छोड़ता शून्‍य से हटता हूँ। किसी की ओर बढ़ता हुआ मैं हो सकता था बहुत...
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