Tag: Hindi kavita

vishesh chandra 'naman'

विशेष चंद्र ‘नमन’ की कविताएँ

मौजूदगी एक बेशकीमती दिन बचा रहता है कल के आने तक हम बांसुरी में इंतज़ार के पंख लपेट हवा को बुलाने से ज़्यादा, कुछ नहीं करते एक अनसुनी...
balkavi bairagi

बालकवि बैरागी की बाल कविताएँ

Poems: Balkavi Bairagi चाँद में धब्बा गोरे-गोरे चाँद में धब्बा दिखता है जो काला-काला, उस धब्बे का मतलब हमने बड़े मज़े से खोज निकाला। वहाँ नहीं है गुड़िया-बुढ़िया वहाँ नहीं बैठी है...
Joshnaa Banerjee Adwanii

जोशना बैनर्जी आडवानी की कविताएँ

बू मैंने एक जगह रुक के डेरा डाला मैंने चाँद सितारों को देखा मैंने जगह बदल दी मैंने दिशाओं को जाना मैं अब ख़ानाबदोश हूँ मैं नख़लिस्तानों के ठिकाने जानती...
Woman with tied child, Mother, Kid

‘माँ’ के लिए कुछ कविताएँ

'माँ' - मोहनजीत मैं उस मिट्टी में से उगा हूँ जिसमें से माँ लोकगीत चुनती थी हर नज्म लिखने के बाद सोचता हूँ- क्या लिखा है? माँ कहाँ इस...
Uday Prakash

उत्कृष्टता

'Utkrishtta', a poem by Uday Prakash सुन्दर और उत्कृष्ट कविताएँ धीरे-धीरे ले जाएँगी सत्ता की ओर सूक्ष्म सम्वेदनाओं और ख़फ़ीफ़ भाषा का कवि देखा जाएगा अत्याचारियों के भोज...
Ashok Vajpeyi

अकेले क्यों?

हम उस यात्रा में अकेले क्यों रह जाएँगे? साथ क्यों नहीं आएगा हमारा बचपन, उसकी आकाश-चढ़ती पतंगें और लकड़ी के छोटे-से टुकड़े को हथियार बना कर दिग्विजय करने का...
Tree, Leaves, Forest, Jungle

पत्ते नीम के

तालियों से बजे पत्ते नीम के। अनवरत चलती रही थी, थक गयी, तनिक आवे पर ठहरकर पक गयी, अब चढ़ी है हवा हत्थे नीम के। था बहुत कड़वा मगर था...
Sudeep Banerjee

वह दीवाल के पीछे खड़ी है

वह दीवाल के पीछे खड़ी है दीवाल का वह तरफ़ उसके कमरे में है जिस पर कुछ लिखा है कोयले से कोयले से की गयी हैं चित्रकारियाँ वन-उपवन, पशु-पक्षी,...
Indu Jain

कोशिश

एक चीख़ लिखनी थी एक बच्चे की चीख़ अरबी में, तुर्की में यिद्दिश में, यैंकीस्तानी में असमिया, हिन्दी, गुरमुखी में चिथड़े उड़े बाप और ऐंठी पड़ी माँ के बीच उठी बच्चे की चीख़—सिर्फ़...
Balraj Sahni

बलराज साहनी की कविताएँ

बलराज साहनी एक अभिनेता के रूप में ही ज्यादा जाने जाते हैं, जबकि उन्होंने एक साहित्यकार के रूप में भी काफी कार्य किया है।...
People, Society, Faces

समाज

कल एक प्राणी से मुलाक़ात हुई जब मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने कहा- 'समाज' प्राणी इसलिए कहा क्योंकि उसकी शक्ल और हरकतें मानवों से तो नहीं मिलती...
Speaking, Speech, Helpless, Shouting, Screaming, Depressed

झूठ बोलिए, सच बोलिए, खचाखच बोलिए

बोलिए बोलना ज़रूरी है सुनना, पढ़ना, समझना मूर्खों के लिए छोड़ दीजिए सत्ता की शय से बोलिए चढ़ गयी मय से बोलिए 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' के लिए बोलिए 'अधिकतम आउटरीच'...
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