‘Besan Ki Saundhi Roti’, poetry by Nida Fazli

बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ
याद आती है चौका बासन चिमटा फुकनी जैसी माँ

बाँस की खर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे
आधी सोयी आधी जागी थकी दो-पहरी जैसी माँ

चिड़ियों की चहकार में गूँजे राधा मोहन अली अली
मुर्ग़े की आवाज़ से बजती घर की कुण्डी जैसी माँ

बीवी बेटी बहन पड़ोसन थोड़ी-थोड़ी सी सब में
दिन भर इक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी माँ

बाँट के अपना चेहरा माथा आँखें जाने कहाँ गई
फटे पुराने इक एल्बम में चंचल लड़की जैसी माँ!

यह भी पढ़ें:

‘माँ होना ज़रूरी नहीं’
ज्योति लांजेवार की कविता ‘माँ’
ऋतुराज की कविता ‘माँ का दुःख’

Book by Nida Fazli:

Previous articleखिड़की
Next articleविकास की क़ीमत
निदा फ़ाज़ली
मुक़्तदा हसन निदा फ़ाज़ली या मात्र 'निदा फ़ाज़ली' हिन्दी और उर्दू के मशहूर शायर थे। इनका जन्म १२ अक्टूबर १९३८ को ग्वालियर में तथा निधन ०८ फ़रवरी २०१६ को मुम्बई में हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here