पानी की भाषा में एक नदी
मेरे बहुत पास से गुज़री।

उड़ने की भाषा में बहुत-से परिन्दे
अचानक फड़फड़ाकर उड़े,
आकाश में बादलों से थोड़ा नीचे।

एक चित्र लिपि में लिखे पेड़ों पर
बहुत सारे पत्ते हिले एक साथ,
पत्तों के हिलने में सरसराने की भाषा थी।

लगा जैसे तुम यहीं कहीं हो
देह की भाषा में अचानक कहीं से आती हुई।
भूलने की भाषा में कुछ न भूले जा सकने वाले को
बुदबुदाती हुई।

राजेश जोशी की कविता 'बच्चे काम पर जा रहे हैं'

Book by Rajesh Joshi:

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राजेश जोशी
राजेश जोशी (जन्म १९४६) साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी साहित्यकार हैं। राजेश जोशी ने कविताओं के अलावा कहानियाँ, नाटक, लेख और टिप्पणियाँ भी लिखीं। साथ ही उन्होंने कुछ नाट्य रूपांतर तथा कुछ लघु फिल्मों के लिए पटकथा लेखन का कार्य भी किया। उनके द्वारा भतृहरि की कविताओं की अनुरचना भूमिका "कल्पतरू यह भी" एवं मायकोवस्की की कविता का अनुवाद "पतलून पहिना बादल" नाम से किए गए है। कई भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अँग्रेजी, रूसी और जर्मन में भी उनकी कविताओं के अनुवाद प्रकाशित हुए हैं। राजेश जोशी के चार कविता-संग्रह- एक दिन बोलेंगे पेड़, मिट्टी का चेहरा, नेपथ्य में हँसी और दो पंक्तियों के बीच, दो कहानी संग्रह - सोमवार और अन्य कहानियाँ, कपिल का पेड़, तीन नाटक - जादू जंगल, अच्छे आदमी, टंकारा का गाना।

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