हो व्यथित तनिक घबराए मन
तब कर लेना स्नेह आलिंगन..

अनवरत नयन से नीर बहे
हृदय व्याकुल हो अधीर रहे
जब बढ़ने लगे रक्त स्पन्दन
तब कर लेना स्नेह आलिंगन..

जब व्याधि व्यथा असाध्य हो
जब हृदय शपित हो बाध्य हो
कांधे पर कर लेना क्रंदन
और कर लेना स्नेह आलिंगन..

जब सन्नाटों का हो कोलाहल
विचलित मन में जब हो हलचल
विवश हो सब से निराश हो मन
तब कर लेना स्नेह आलिंगन..

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