Tag: Dalit Kavita
तब तुम्हारी निष्ठा क्या होती?
यदि वेदों में लिखा होता
ब्राह्मण ब्रह्मा के पैर से हुए हैं पैदा।
उन्हें उपनयन का अधिकार नहीं।
तब, तुम्हारी निष्ठा क्या होती?
यदि धर्मसूत्रों में लिखा होता
तुम...
चुनौती
तुमने चुरा लिए
हमारे विकास के रास्ते
शिक्षा पर लगा दिए प्रतिबंध
आखर पर आज रख दी है तुमने
हमारी भागीदारी के लिए
योग्यता की शर्त
पर कब तक फेकोगे...
माँ! मैं भला कि मेरा भाई?
अनुवादः साहिल परमार तथा फूलचंद गुप्ता
तुम्हारी चमर कौं-कौं से मैं तंग आ गई
तुमने तो राग बिना ही नौटंकी कर रखी है
तुम्हारे बाबा क्या गए
तुमने...
घृणा तुम्हें मार सकती है
चाहे संकीर्ण कहो या पूर्वाग्रही
मैं जिस टीस को बरसों-बरस
सहता रहा हूँ
अपनी त्वचा पर
सुई की चुभन जैसे,
उसका स्वाद एक बार चखकर देखो
हिल जाएगा पाँव तले...


