Tag: Hindi Story

mare gaye ghulfam, teesri kasam - phanishwarnath renu

‘मारे गये गुलफ़ाम’ उर्फ़ ‘तीसरी क़सम’

"आप मुझे गुरू जी मत कहिए।" "तुम मेरे उस्ताद हो। हमारे शास्तर में लिखा हुआ है, एक अच्छर सिखानेवाला भी गुरू और एक राग सिखानेवाला भी उस्ताद!" "इस्स! सास्तर-पुरान भी जानती हैं! ...मैंने क्या सिखाया? मैं क्या ...?" हीरा हँस कर गुनगुनाने लगी - "हे-अ-अ-अ- सावना-भादवा के-र ...!" हिरामन अचरज के मारे गूँगा हो गया। ...इस्स! इतना तेज जेहन! हू-ब-हू महुआ घटवारिन!
Silent, Quiet, Silence, Woman, Shut, Do not speak, Taboo

सैक्स फंड

'सैक्स फंड' - सुषमा गुप्ता "आंटी जी चंदा इकठ्ठा कर रहें हैं। आप भी कुछ अपनी इच्छा से दे दीजिए।" "अरे लड़कियों, ये काॅलेज छोड़ कर...
premchand

अलग्योझा

क्या आप अपने माता-पिता को समझाते-समझाते हार गए हैं कि वे ऐसे रिश्तेदारों/भाईयों का साथ न दें या उनकी शर्म/आदर न करें जो उनसे स्नेह तक नहीं रखते? लेकिन उनका जवाब कुछ ऐसा होता है कि- "लाठी मारने से पानी अलग हो सकता है भला?" प्रेमचंद की कहानी 'अलग्योझा' एक ऐसा दस्तावेज है जिसमें झाँकने से हमें पता लगता है कि हमारे अपनों का यह 'उदार' व्यवहार, उनकी धोखा खाने की आदत की वजह से नहीं है, बल्कि उस दृष्टि की वजह से है जिससे पहले लोग रिश्तों को देखा करते थे! एक स्तर पर प्रासंगिक न भी लगे, फिर भी पढ़ कर देखिए! :)
Labor, Man carrying bucket of mud

मज़दूर का एक दिन

"बाबूजी ठीक ही तो कहते थे कि गरीब का दिल तो बेबसी का ठिकाना होता है।"
Rabindranath Tagore

कवि का हृदय

"यदि कवि के हृदय में हिम है तो तुम वसन्त ऋतु की उष्ण समीर का झोंका बन जाओगी, जो हिम को भी पिघला देगा। यदि उसमें जल की गहराई है तो तुम उस गहराई में मोती बन जाओगी। यदि निर्जन वन है तो तुम उसमें सुख और शांति के बीज बो दोगी। यदि अजंता की गुफा है तो तुम उसके अंधेरे में सूर्य की किरण बनकर चमकोगी।"
Kamleshwar

दिल्ली में एक मौत

"सात नंबर की बस छूट रही है। सूलियों पर लटके ईसा उसमें चले जा रहे हैं और क्यू में खड़े और लोगों को कंडक्टर पेशगी टिकट बाँट रहा है। हर बार जब भी वह पैसे वापस करता है तो रेजगारी की खनक यहाँ तक आती है। धुंध में लिपटी रूहों के बीच काली वर्दी वाला कंडक्टर शैतान की तरह लग रहा है। और अर्थी अब कुछ और पास आ गई है।"
Love, Couple, Shakespeare, Play

मगर शेक्सपियर को याद रखना

"खुशी के दिन आसमान पर नए चाँद को जन्म देंगे, लेकिन ये पुराना चाँद घटने में कितनी देर लगा रहा है, इसने मेरी ख्वाहिशात को कुछ इस तरह रोक रखा है, जैसे कोई सौतेली माँ या रईस बेवा एक नौजवान के प्रेम पर पाबंदी लगा दे..।" "चालाक नवयुवक स्वाभाविक रूप से घृणा से भरे हुए ही होते हैं। वे शिकायत करते-करते थक जाते हैं कि दुनिया उनकी प्रतिभा का सम्मान नहीं करती। वे कुछ देना चाहते हैं पर कोई लेना नहीं चाहता। वे प्रसिद्धि पाने के लिए आतुर होते हैं पर वह उनके रास्ते आते नहीं दिखती।"
Jaishankar Prasad

पुरस्कार

आज राष्ट्रवाद की आड़ में लोगों को स्वार्थी कहकर उनके विवेक पर प्रश्न उठाना आम बात है। फिर स्वार्थ की बात करें तो प्रेम से बड़ा स्वार्थ कोई है? लेकिन मधूलिका ने दोनों को साधा, यह इशारा किए बगैर कि उसकी मंशा किसी एक को भी साधने की है। पढ़िए जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध एवं उत्कृष्ट कहानी 'पुरस्कार'!
Gulzar

धुआँ

एक मुसलमान चौधरी का बड़ा सम्मान था गांव में, हिन्दू और मुस्लिम दोनों वर्गों में, लेकिन केवल तब तक जब तक कि उनकी मौत के बाद उनका वसीयतनामा सामने न आ गया, जिसमें लिखा था कि उन्हें दफनाया न जाए, बल्कि जलाया जाए! हालात ऐसे बने कि कब्र भी खोदी गयी और आग की लपटों का धुआँ भी उठा.. मगर यह कैसे और क्यों हुआ, पढ़िए गुलज़ार साहब की इस बेहतरीन कहानी में!
usne toh nahin kaha tha - shaliesh matiyani

उसने तो नहीं कहा था

चंद्रधर शर्मा गुलेरी की कहानी 'उसने कहा था' में एक सिपाही युद्ध के मैदान में भी अपने प्रेम वचनों को याद रखता है, लेकिन शैलेश मटियानी की इस कहानी में किसी वचन का कोई बंधन नहीं था, फिर भी प्रेम सर्वोपरि रहा! इर्ष्या, क्रोध, असुरक्षा सभी को दरकिनार करता प्रेम! यह कहानी एक उदाहरण भी है कि कैसे एक रचना किसी दूसरी उत्कृष्ट रचना की प्रेरणा बन सकती है!
Child Labour

कुत्ते की पूँछ

"मनुष्यता का चस्का एक दफे लग जाने पर किसी को जानवर बनाये रखना भी तो सम्भव नहीं।" क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि किसी से दोस्ती करके या किसी को अपने जीवन में जगह देकर आपने बड़ा महसूस किया हो? और बाद में उस व्यक्ति के आपसे खुलते जाने पर आपको अफ़सोस भी हुआ हो? यदि हाँ, तो यह कहानी बेसब्री से आपका इंतज़ार कर रही है!
Shrilal Shukla

एक चोर की कहानी

"राजा बलि ने कहा कि राजा युधिष्ठिर को चाहिए कि वे खुद दंड लें। बामन को दंड नहीं होगा। जिस राजा के राज में पेट की खातिर चोरी करनी पड़े वह राजा दो कौड़ी का है। उसे दंड मिलना चाहिए..।" लेकिन आज तो पेट की खातिर इंसानों को आत्महत्या करते देखकर भी राजा के कान पर जूँ तक नहीं रेंगती! वो शायद इसलिए कि उनके बचपन में उन्हें ऐसी कहानियाँ नहीं सुनाई गयीं। आप अपने बच्चों को सुनाइए, पढ़ाइए.. क्या खबर वो कल किस पद तक पहुंचे?!
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