Tag: Hindi Story

Leo Tolstoy

एक चिंगारी घर को जला देती है

अनुवाद: प्रेमचंदएक समय एक गांव में रहीम खां नामक एक मालदार किसान रहता था। उसके तीन पुत्र थे, सब युवक और काम करने में...
premchand

कफ़न

'कफ़न' - प्रेमचंदझोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की...

आदमी और कुत्ता

मैं आपके सामने अपने एक रेल के सफर का बयान पेश कर रहा हूँ। यह बयान इसीलिए है कि सफर में मेरे साथ जो...
raja radhika raman prasad singh

कानों में कँगना

'कानों में कँगना' - राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह "किरन! तुम्हारे कानों में क्या है?"उसने कानों से चंचल लट को हटाकर कहा - "कँगना।""अरे! कानों में कँगना?"...
mausi - bhuvaneshwar

मौसी

'मौसी' - भुवेनश्वरमानव-जीवन के विकास में एक स्थल ऐसा आता है, जब वह परिवर्तन पर भी विजय पा लेता है। जब हमारे जीवन का...
Rabindranath Tagore

काबुलीवाला

मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने...
Woman in Sari, Pallu

दुलाईवाली

हिन्दी की पहली मौलिक कहानी मानी जाने वाली कहानी 'दुलाईवाली' राजेन्द्रबाला घोष के द्वारा लिखी गयी थी, जिन्हें 'बंग महिला' के नाम से भी जाना जाता है।दुलाई का अर्थ होता है रजाई, दुलाईवाली मतलब रजाईवाली। बंशीधर को, ट्रेन में सफ़र करते वक़्त एक दुलाईवाली बीच-बीच में घूंघट की आड़ से ताक रही है और दूसरी तरफ एक और महिला रो रहीं हैं जिनके पति शायद पिछले स्टेशन पर कहीं छूट गए हैं और जिनकी मदद करने की जिम्मेदारी बंशीधर ने ले ली है। स्टेशन पर उतरकर बंशीधर कैसे इन दो महिलाओं से पार पाते हैं, यह पढ़िए इस रोचक कहानी में!
Jaishankar Prasad

सुनहला साँप

'सुनहला साँप' - जयशंकर प्रसाद''यह तुम्हारा दुस्साहस है, चन्द्रदेव!''''मैं सत्य कहता हूँ, देवकुमार।''''तुम्हारे सत्य की पहचान बहुत दुर्बल है, क्योंकि उसके प्रकट होने...
Shivani (Gaura Pant)

लाटी

अगर आपका अतीत आपके सामने आकर खड़ा हो जाए, जिसे आप अपने वर्तमान के साथ खड़ा नहीं कर सकते तो उससे नज़रें मिलाना कितना कठिन होगा? और अगर ऐसे में वह अतीत गूँगा हो, एकटक आपको घूरता सा प्रतीत हो और उसकी नियति का फैसला केवल आपके मौन या मौन न रहने पर निर्भर हो, तो आपका चुनाव इन विकल्पों में से क्या होगा?
gyarah varsh ka samay - ramchandra shukla

ग्यारह वर्ष का समय

"आज पाँच वर्ष मुझे इस स्‍थान पर आए हुए; संसार में किसी मनुष्‍य को आज तक यह प्रकट नहीं हुआ। यहाँ प्रेतों के भय से कोई पदार्पण नहीं करता; इससे मुझे अपने को गोपन रखने में विशेष कठिनता नहीं पड़ती। संयोगवश रात्रि में किसी की दृष्टि यदि मुझ पर पड़ी भी तो चुड़ैल के भ्रम से मेरे निकट तक आने का किसी को साहस न हुआ। यह आज प्रथम ऐसा संयोग उपस्थित हुआ है; तुम्‍हारे साहस को मैं सराहती हूँ और प्रार्थना करती हूँ कि तुम अपने शपथ पर दृढ़ रहोगे।"
Mother, Son, Kid, Baby, Child

माँ-बेटे

'माँ-बेटे' - भुवनेश्वरचारपाई को घेरकर बैठे हुए उन सब लोगों ने एक साथ एक गहरी साँस ली। वह सब थके-हारे हुए खामोश थे।...
premchand

माँ

"करूणा द्वार पर आ बैठती और मुहल्ले-भर के लड़कों को जमा करके दूध पिलाती। दोपहर तक मक्खन निकालती और वह मक्खन मुहल्ले के लड़के खाते। फिर भाँति-भाँति के पकवान बनाती और कुत्तों को खिलाती। अब यही उसका नित्य का नियम हो गया। चिड़ियाँ, कुत्ते, बिल्लियाँ चींटे-चीटियाँ सब अपने हो गये। प्रेम का वह द्वार अब किसी के लिए बन्द न था। उस अंगुल-भर जगह में, जो प्रकाश के लिए भी काफी न थी, अब समस्त संसार समा गया था।"

STAY CONNECTED

42,115FansLike
20,941FollowersFollow
29,086FollowersFollow
1,850SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Magnus Grehn

स्वीडिश कवि मैगनस ग्रेन की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा आंधी के बाद सेंट फ़ेगंस जाने की राह में एम 4 पर हमारी गाड़ी दौड़ गई वेल्स के बीचों-बीच सेंट फ़ेगंस की ओर आंधी के बाद...
Naomi Shihab Nye

नेओमी शिहैब नाय की कविता ‘प्रसिद्ध’

नेओमी शिहैब नाय (Naomi Shihab Nye) का जन्म सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था। उनके पिता एक फ़िलिस्तीनी शरणार्थी थे और उनकी माँ जर्मन...
Shehar Se Dus Kilometer - Nilesh Raghuwanshi

किताब अंश: ‘शहर से दस किलोमीटर’ – नीलेश रघुवंशी

'शहर से दस किलोमीटर' ही वह दुनिया बसती है जो शहरों की न कल्पना का हिस्सा है, न सपनों का। वह अपने दुखों, अपने...
Shri Vilas Singh

श्रीविलास सिंह की कविताएँ

सड़कें कहीं नहीं जातीं सड़कें कहीं नहीं जातीं वे बस करती हैं दूरियों के बीच सेतु का काम, दो बिंदुओं को जोड़तीं रेखाओं की तरह, फिर भी वे पहुँचा देती...
Ret Samadhi - Geetanjali Shree

गीतांजलि श्री – ‘रेत समाधि’

गीतांजलि श्री का उपन्यास 'रेत समाधि' हाल ही में इस साल के लिए दिए जाने वाले बुकर प्राइज़ के लिए चयनित अन्तिम छः किताबों...
Tom Phillips

टॉम फ़िलिप्स की कविताएँ

अनुवाद: पंखुरी सिन्हा युद्ध के बाद ज़िन्दगी कुछ चीज़ें कभी नहीं बदलतीं बग़ीचे की झाड़ियाँ हिलाती हैं अपनी दाढ़ियाँ बहस करते दार्शनिकों की तरह जबकि पैशन फ़्रूट की नारंगी मुठ्ठियाँ जा...
Javed Alam Khan

जावेद आलम ख़ान की कविताएँ

तुम देखना चांद तुम देखना चांद एक दिन कविताओं से उठा ज्वार अपने साथ बहा ले जाएगा दुनिया का तमाम बारूद सड़कों पर क़दमताल करते बच्चे हथियारों को दफ़न...
Shyam Bihari Shyamal - Sangita Paul - Kantha

श्यामबिहारी श्यामल जी के साथ संगीता पॉल की बातचीत

जयशंकर प्रसाद के जीवन पर केंद्रित उपन्यास 'कंथा' का साहित्यिक-जगत में व्यापक स्वागत हुआ है। लेखक श्यामबिहारी श्यामल से उपन्यास की रचना-प्रकिया, प्रसाद जी...
Shaheen Bagh - Bhasha Singh

किताब अंश: शाहीन बाग़ – लोकतंत्र की नई करवट

भाषा सिंह की किताब 'शाहीन बाग़ : लोकतंत्र की नई करवट' उस अनूठे आन्दोलन का दस्तावेज़ है जो राजधानी दिल्ली के गुमनाम-से इलाक़े से...
Woman with dupatta

सहेजने की आनुवांशिकता में

कहीं न पहुँचने की निरर्थकता में हम हमेशा स्वयं को चलते हुए पाते हैं जानते हुए कि चलना एक भ्रम है और कहीं न पहुँचना यथार्थदिशाओं के...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)