Tag: Mannu Bhandari

Aapka Bunti - Mannu Bhandari

किताब अंश: ‘आपका बंटी’ – मन्नू भण्डारी

'आपका बंटी' मन्नू भण्डारी की अत्यन्त चर्चित और हिन्दी उपन्यासों के इतिहास में मील का पत्थर मानी जानेवाली कृति है। टूटते परिवारों के बीच...
Mannu Bhandari Mahabhoj

मन्नू भण्डारी – ‘महाभोज’

मन्नू भण्डारी के उपन्यास 'महाभोज' से उद्धरण | Quotes from 'Mahabhoj', a novel by Mannu Bhandari चयन व प्रस्तुति: पुनीत कुसुम   "अपने व्यक्तिगत दुख-दर्द, अंतर्द्वंद्व या...
Mannu Bhandari

अकेली

सोमा बुआ बुढ़िया है।सोमा बुआ परित्यक्ता है।सोमा बुआ अकेली है।सोमा बुआ का जवान बेटा क्या जाता रहा, उनकी जवानी चली गयी। पति को पुत्र-वियोग...
Mannu Bhandari

सयानी बुआ

सब पर मानो बुआजी का व्यक्तित्व हावी है। सारा काम वहाँ इतनी व्यवस्था से होता जैसे सब मशीनें हों, जो क़ायदे में बँधीं, बिना...
Mannu Bhandari

स्त्री सुबोधिनी

प्यारी बहनो, न तो मैं कोई विचारक हूँ, न प्रचारक, न लेखक, न शिक्षक। मैं तो एक बड़ी मामूली-सी नौकरीपेशा घरेलू औरत हूँ, जो...
Mannu Bhandari

त्रिशंकु

"अपने घर की किशोरी लड़की को छेड़ने वाले लड़कों को घर बुलाकर चाय पिलाई जाए और लड़की से दोस्ती करवाई जाए, यह सारी बात ही बड़ी थ्रिलिंग और रोमांचक लग रही थी।"आधुनिक सोच रखना और उसे अपने व्यवहार में ढाल लेना दो अलग-अलग बातें हैं.. और इसका प्रमाण हम सबको अपने घरों में अक्सर देखने को मिलता है जब बातें तो बड़ी-बड़ी होती हैं लेकिन जब उन बातों पर अमल करने की बात आती है तो समाज और सोसाइटी सबसे बड़ा मुद्दा और भगवान् बन जाती है जिसके नियमों के विरुद्ध जाने का साहस हर किसी में नहीं होता! सोच और व्यवहार के इस अंतर का ही मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करती हैं मन्नू भंडारी अपनी इस कहानी 'त्रिशंकु' में! हिन्दी की एक उत्कृष्ट कहानी। पढ़िए!
nayi kitaab - bandi

मन्नू भंडारी कृत ‘बन्दी’

विवरण: मन्नू भंडारी की अभी तक असंकलित कहानियों की यह प्रस्तुति पाठकों को एक बार फिर अपनी उस प्रिय कथाकार की जादुई कलम की याद...

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Nurit Zarchi

नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’

नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
Naresh Mehta

कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
Vishesh Chandra Naman

मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
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कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
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नहीं है तुम्हारी देह में यह रुधिर जिसके वर्ण में अब ढल रही है दिवा और अँधेरा सालता हैरोज़ थोड़ी मर रही आबादियों में रोज़ थोड़ी बढ़ रही...
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कहानी: 'सातवाँ आदमी' लेखक: हारुकी मुराकामी जापानी से अनुवाद: क्रिस्टोफ़र एलिशन हिन्दी अनुवाद: श्रीविलास सिंह"वह मेरी उम्र के दसवें वर्ष के दौरान सितम्बर का एक अपराह्न था...
Aashika Shivangi Singh

आशिका शिवांगी सिंह की कविताएँ

माँ-पिता प्रेमी-प्रेमिका नहीं बन सके मेरी माँ जब भी कहती है— "प्रेम विवाह ज़्यादा दिन नहीं चलते, टूट जाते हैं" तब अकस्मात ही मुझे याद आने लगते...
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कविता सरहदों के पार, हक़ीक़त के बीच दरार और कुछ बेतरतीब विचार

वरिष्ठ ताइवानी कवि एवं आलोचक ली मिन-युंग की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का संकलन 'हक़ीक़त के बीच दरार' जुलाई में पाठकों तक पहुँचा। साहित्यिक...
Thaharti Sanson Ke Sirhane Se - Ananya Mukherjee

दुःख, दर्द और उम्मीद का मौसम (अनन्य मुखर्जी की कैंसर डायरी)

'ठहरती साँसों के सिरहाने से' अनन्या मुखर्जी की डायरी है जो उन्होंने 18 नवम्बर, 2018 को स्तन कैंसर से लड़ाई हार जाने से पहले...
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