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जावेद आलम ख़ान की कविताएँ
तुम देखना चांद
तुम देखना चांद
एक दिन कविताओं से उठा ज्वार
अपने साथ बहा ले जाएगा दुनिया का तमाम बारूद
सड़कों पर क़दमताल करते बच्चे
हथियारों को दफ़न...
कविताएँ: फ़रवरी 2022
अच्छी दुनिया
रहे हैं अच्छी दुनिया के मायने हमेशा से—
खिले फूल और तितलियाँ,
उड़ती चिड़ियाँ और हरे पेड़।
हँसते-खिलखिलाते बच्चे और उनके खेल,
प्रेम में डूबे हृदय और...
युद्ध-विराम
नहीं, अभी कुछ नहीं बदला है।
अब भी
ये रौंदे हुए खेत
हमारी अवरुद्ध जिजिविषा के
सहमे हुए साक्षी हैं;
अब भी
ये दलदल में फँसी हुई मौत की मशीनें
उनके...
प्रेम ही एकमात्र बचा हुआ सफ़ेद ध्वज होगा
सारी लाशें उठकर चल पड़ेंगी
क़ब्र को चीरकर
सरहदों पर दफ़नाए गए सैनिक रो पड़ेंगें
दोनों ओर की ज़मीन से फूटेगा
ख़ून का एक दरिया
पेड़ों की पत्तियाँ हो जाएँगी सुर्ख़
सारे...
अमन का राग
सच्चाइयाँ
जो गंगा के गोमुख से मोती की तरह बिखरती रहती हैं
हिमालय की बर्फ़ीली चोटी पर चाँदी के उन्मुक्त नाचते
परों में झिलमिलाती रहती हैं
जो एक...




